सचिन तेंदुलकर का नाम आते ही शतकों का शतक, सबसे ज्यादा रन और लंबे इंटरनेशनल करियर की तस्वीर सामने आती है। उन्होंने 24 साल तक क्रिकेट खेला और दुनिया के बड़े से बड़े गेंदबाजों का सामना किया। लेकिन क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है, जहां महान बल्लेबाज भी कभी-कभी बिना खाता खोले लौट जाते हैं। सचिन के साथ भी ऐसा हुआ। अपने पूरे इंटरनेशनल करियर में वह 34 बार शून्य पर आउट हुए। यह आंकड़ा बताता है कि बड़े खिलाड़ी भी हर दिन बड़ी पारी नहीं खेल पाते।
वेस्टइंडीज ने सबसे ज्यादा रोका
सचिन तेंदुलकर को इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा बार शून्य पर आउट करने वाली टीम वेस्टइंडीज रही। सचिन वेस्टइंडीज के खिलाफ आठ बार बिना खाता खोले पवेलियन लौटे। उन्होंने इस टीम के खिलाफ कुल 60 मुकाबले खेले थे। वेस्टइंडीज की तेज गेंदबाजी हमेशा दुनिया भर के बल्लेबाजों के लिए मुश्किल रही है। कई दौर में उसके पास ऐसे तेज गेंदबाज रहे, जो नई गेंद से बल्लेबाजों को लगातार परेशान करते थे। सचिन जैसे बड़े बल्लेबाज का आठ बार डक होना इसी चुनौती की कहानी कहता है।
पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया भी आगे
इस लिस्ट में पाकिस्तान दूसरे नंबर पर रहा। सचिन पाकिस्तान के खिलाफ सात बार शून्य पर आउट हुए। भारत और पाकिस्तान के मुकाबलों में दबाव हमेशा ज्यादा रहता था, इसलिए हर गेंद पर फैंस की नजर होती थी। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी सचिन छह बार खाता नहीं खोल सके। ऑस्ट्रेलियाई टीम उस दौर में बेहद मजबूत मानी जाती थी और उसके गेंदबाजों ने कई बार सचिन को शुरुआत में ही रोक दिया। न्यूजीलैंड के खिलाफ भी सचिन पांच बार बिना रन बनाए आउट हुए थे।
इंग्लैंड के खिलाफ अलग कहानी
हैरानी वाली बात यह है कि इंग्लैंड के खिलाफ सचिन कभी इंटरनेशनल डक पर आउट नहीं हुए। उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ 69 मुकाबले खेले, लेकिन हर बार कम से कम एक रन जरूर बनाया। बांग्लादेश के खिलाफ 19 मैचों में भी वह शून्य पर आउट नहीं हुए। इसके अलावा बरमूडा, आयरलैंड, केन्या, नीदरलैंड, यूएई और नामीबिया के खिलाफ भी सचिन बिना खाता खोले पवेलियन नहीं लौटे। यह आंकड़ा दिखाता है कि अलग-अलग टीमों के खिलाफ उनका रिकॉर्ड कितना अलग रहा।
वनडे में ज्यादा बार जीरो
सचिन टेस्ट क्रिकेट की तुलना में वनडे में ज्यादा बार डक पर आउट हुए। टेस्ट करियर में वह 14 बार शून्य पर आउट हुए, जबकि वनडे में यह आंकड़ा 20 बार रहा। वनडे में तेज रन बनाने और बड़े शॉट खेलने का दबाव ज्यादा रहता है। कई बार बल्लेबाज शुरुआत से ही आक्रामक खेलता है और गलती होने पर जल्दी आउट हो जाता है। सचिन ने भी अपने करियर में कई बार टीम के लिए तेज शुरुआत देने की कोशिश की, जिसमें कुछ मौकों पर वह बिना रन बनाए आउट हुए।
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महानता पर कोई असर नहीं
डक का यह आंकड़ा सचिन तेंदुलकर की महानता को कम नहीं करता। उन्होंने 1989 से 2013 तक 664 इंटरनेशनल मैच खेले और 100 इंटरनेशनल शतक लगाए। वह आज भी इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों में सबसे ऊपर हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ आठ डक जरूर उनके नाम हैं, लेकिन उसी सचिन ने दुनिया की हर बड़ी टीम के खिलाफ यादगार पारियां भी खेलीं। यही क्रिकेट की खूबसूरती है कि रिकॉर्ड बनाने वाला खिलाड़ी भी कभी-कभी शून्य पर लौटता है।