साल 2012 भारतीय क्रिकेट के लिए आसान नहीं था। वर्ल्ड कप जीत के बाद टीम का प्रदर्शन अचानक गिरने लगा था। विदेशी दौरों पर भारत को लगातार हार का सामना करना पड़ा। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में टीम को 0-4 से हार मिली। इस दौरान सचिन तेंदुलकर का बल्ला भी पहले जैसा नहीं चल रहा था। लंबे समय से टीम की रीढ़ रहे सचिन के प्रदर्शन पर सवाल उठने लगे थे और क्रिकेट जगत में यह चर्चा तेज हो गई थी कि क्या अब उनका करियर अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है।
टीम में नए खिलाड़ी की तलाश शुरू
इसी समय टीम के कई दिग्गज खिलाड़ी भी संन्यास ले चुके थे। सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण जैसे अनुभवी खिलाड़ी पहले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह चुके थे। ऐसे में चयन समिति के सामने टीम को नई दिशा देने की चुनौती थी। पूर्व मुख्य चयनकर्ता संदीप पाटिल ने एक इंटरव्यू में बताया कि उस समय चयनकर्ताओं के बीच यह चर्चा शुरू हो गई थी कि अब टीम को सचिन तेंदुलकर के विकल्प के बारे में भी सोचना चाहिए।
नागपुर टेस्ट के बाद हुई अहम बातचीत
इंग्लैंड के खिलाफ नागपुर टेस्ट में हार के बाद चयन समिति ने एक अहम बैठक की। उसी दौरान सचिन तेंदुलकर से उनके भविष्य को लेकर सीधे बातचीत करने का फैसला किया गया। संदीप पाटिल ने बताया कि उन्होंने और एक अन्य चयनकर्ता ने टीम मैनेजमेंट से अनुमति लेकर सचिन को बुलाया। बातचीत के दौरान उनसे पूछा गया कि आगे उनका क्या प्लान है। चयन समिति को लग रहा था कि अब टीम में नए खिलाड़ियों को मौका देना जरूरी हो सकता है।
बात सुनकर हैरान रह गए सचिन
जब सचिन से उनके भविष्य को लेकर सवाल किया गया तो वे कुछ समय के लिए चौंक गए थे। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि चयन समिति इस तरह का सवाल उठाएगी। बातचीत के दौरान उन्होंने पूछा कि क्या सच में चयनकर्ताओं को ऐसा लगता है कि अब उनका समय खत्म हो रहा है। पाटिल के अनुसार उन्होंने साफ कहा कि टीम को आगे बढ़ाने के लिए नए विकल्पों पर भी विचार करना जरूरी है। यह बातचीत भारतीय क्रिकेट के इतिहास के सबसे संवेदनशील पलों में से एक मानी जाती है।
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वनडे क्रिकेट को कहा अलविदा
इस बातचीत के कुछ समय बाद सचिन तेंदुलकर ने एक बड़ा फैसला लिया। उन्होंने वनडे क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया। हालांकि उन्होंने टेस्ट क्रिकेट खेलना जारी रखा। उस समय भी क्रिकेट प्रेमियों को उम्मीद थी कि सचिन फिर से अपने पुराने फॉर्म में लौट आएंगे, लेकिन अगले एक साल में उनका प्रदर्शन पहले जैसा नहीं रहा। इसके बावजूद मैदान पर उनका अनुभव टीम के लिए अहम बना रहा।
2013 में खत्म हुआ महान करियर
आखिरकार साल 2013 में सचिन तेंदुलकर ने अपने 24 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर को अलविदा कह दिया। वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज के साथ उन्होंने आखिरी मैच खेला। सचिन 200 टेस्ट खेलने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बने और 34 हजार से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय रन बनाकर क्रिकेट इतिहास में अमर हो गए। आज भी उनका नाम दुनिया के महानतम बल्लेबाजों में सबसे ऊपर लिया जाता है।