आगरा का ताजमहल हमेशा भीड़ देखता है, लेकिन उस दिन नज़ारा बिल्कुल अलग था क्योंकि वहां कोई फिल्म स्टार नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर छाई अघोरी साध्वी चंचलनाथ पहुंचीं. हाथ में त्रिशूल, दूसरे हाथ में डमरू। लोगों ने जैसे ही साध्वी को देखा, भीड़ उमड़ पड़ी. हर कोई अपने फोन निकालकर वीडियो बनाने लगा, फोटो खिंचवाने लगा, और माहौल में एक अलग ही तरह की ऊर्जा फैल गई लेकिन ये उत्साह ज्यादा देर नहीं चला, क्योंकि ASI और CISF ने सुरक्षा नियमों के चलते उनकी एंट्री रोक दी. उन्होंने कहा त्रिशूल और डमरू ताजमहल के अंदर नहीं ले जाए जा सकते. साध्वी पहले तो राज़ी हुईं, लेकिन जब उनका निजी बर्तन भी अंदर ले जाने से रोका गया, तो माहौल बदल गया और वहीँ से असली कहानी शुरू हुई.
ताजमहल छोड़ा, भक्तों की निराशा बढ़ी
जब अधिकारियों ने बर्तन तक अंदर ले जाने से मना किया, साध्वी चंचलनाथ नाराज हो गईं. उन्होंने कहा कि यह बर्तन साधना का हिस्सा है, इससे वे भोजन करती हैं. CISF अपनी जगह सही थी, लेकिन साध्वी अपनी साधना के नियमों में पक्की थी. आखिरकार उन्होंने निर्णय लिया अगर साधना का सामान अंदर नहीं जा सकता, तो मैं भी अंदर नहीं जाऊंगी और वो बिना ताजमहल का दर्शन किए वापस लौट गईं. बाहर मौजूद भक्त इस फैसले से स्तब्ध रह गए. कई लोगों ने कहा मां काली की साध्वी आई थीं, दर्शन हो जाते तो जीवन सफल हो जाता. उनके ताजमहल लौटने का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो गया और चर्चा और बढ़ती चली गई.
आखिर कौन हैं साध्वी चंचलनाथ ?
साध्वी चंचलनाथ कोई साधारण साध्वी नहीं हैं. सिर्फ 7 साल की उम्र में घर छोड़कर आध्यात्मिक साधना शुरू की. पश्चिम बंगाल के आध्यात्मिक परिवार में जन्मी चंचलनाथ को उनके कुलगुरु ने गुरु के हवाले कर दिया था. 12-13 साल तक कठोर तपस्या, फिर पूरे देश में घूमकर अलग-अलग संप्रदायों की साधना. आज वे हरियाणा के करनाल के प्रसिद्ध मां काली मंदिर की मुख्य पुजारी हैं और ‘चंचल माता’ के नाम से जानी जाती हैं. लोग कहते हैं वे बिना किसी साधन के हवन में आग जला देती हैं, नींबू हवा में तैरने लगता है, और कई भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. सोशल मीडिया पर उनके करोड़ों व्यूज हैं इंस्टाग्राम, यूट्यूब, हर जगह उनका जलवा है.
सोशल मीडिया पर साध्वी की लोकप्रियता
साध्वी चंचलनाथ की ताजमहल वाली घटना सोशल मीडिया पर बवाल मचा चुकी है. लोग कह रहे हैं इतनी शक्तिशाली साध्वी को ताजमहल में रोका गया? ये तो अनोखी बात है. उनके ताजमहल के बाहर रुकने पर भारी भीड़ जमा हुई और लोग उनके चरण छूते नजर आए. फोटोग्राफर, भक्त, राहगीर हर किसी ने उनका वीडियो बनाया. यही वजह है कि आज साध्वी चंचलनाथ सिर्फ करनाल या बंगाल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुकी हैं.