Sagar Ratna Success Story : दिल्ली का जनपथ स्थित सागर रत्ना रेस्टोरेंट बुधवार को उस वक्त सियासी चर्चा का केंद्र बन गया, जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लंच पर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और विपक्ष के कई नेता यहां पहुंचे। नेताओं ने दक्षिण भारतीय व्यंजनों का स्वाद लिया और आगे की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा की। लेकिन जिस रेस्टोरेंट में यह लंच हुआ, उसकी कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। सागर रत्ना की शुरुआत जयराम बनान ने की थी, जिन्होंने बेहद छोटे स्तर से शुरुआत कर एक बड़ा दक्षिण भारतीय शाकाहारी रेस्टोरेंट ब्रांड खड़ा किया। कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, आज सागर रत्ना के भारत में 175 से ज्यादा आउटलेट हैं।
13 साल की उम्र में छोड़ा घर
जयराम बनान का जन्म कर्नाटक के उडुपी में हुआ था। स्कूली पढ़ाई के दौरान एक कक्षा में फेल होने के बाद उन्हें पिता की डांट और मार का डर सताने लगा। करीब 13 साल की उम्र में उन्होंने घर छोड़ दिया और मुंबई पहुंच गए। वहां एक परिचित के रेस्टोरेंट में उन्हें काम मिला। कम उम्र और अनुभव न होने के कारण शुरुआत जूठे बर्तन धोने से हुई। इस काम के लिए उन्हें महीने के सिर्फ 18 रुपये मिलते थे।
18 रुपये की नौकरी से मैनेजर तक
बानन ने करीब छह साल तक रेस्टोरेंट में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं। उनकी मेहनत और काम सीखने की लगन देखकर उन्हें पहले वेटर और बाद में मैनेजर बनाया गया। मैनेजर बनने पर उनकी मासिक कमाई करीब 200 रुपये तक पहुंच गई। नौकरी के दौरान उन्होंने सिर्फ वेतन पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि रसोई, ग्राहकों की पसंद, सेवा और रेस्टोरेंट संचालन की बारीकियां भी सीखीं। यही अनुभव आगे उनके कारोबार की नींव बना।
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दिल्ली से शुरू हुआ अपना कारोबार
मुंबई में वर्षों काम करने के बाद जयराम बनान अपना कारोबार शुरू करने के लिए दिल्ली आए। उन्होंने पहले कैंटीन का काम संभाला और बाद में दक्षिण दिल्ली की डिफेंस कॉलोनी में ‘सागर’ नाम से अपना पहला रेस्टोरेंट खोला। सागर रत्ना की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह रेस्टोरेंट 1986 में शुरू हुआ था। शुरुआती दौर में यह करीब 40 लोगों की क्षमता वाला छोटा रेस्टोरेंट था। खाने की गुणवत्ता और साफ-सफाई पर जोर देने से ग्राहकों का भरोसा बढ़ा।
फ्रेंचाइजी से देश-विदेश तक विस्तार
सागर रत्ना ने बाद में फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिए तेजी से विस्तार किया। कंपनी के इतिहास के अनुसार 1999 में लुधियाना में पहला फ्रेंचाइजी आउटलेट शुरू हुआ। इसके बाद ब्रांड ने देश के कई हिस्सों में अपनी मौजूदगी बनाई। 2005 में सिंगापुर से अंतरराष्ट्रीय विस्तार की शुरुआत हुई और 2011 में बैंकॉक में भी आउटलेट खोला गया। कंपनी की वेबसाइट फिलहाल भारत में 175 से अधिक आउटलेट और चार दशक की विरासत का उल्लेख करती है।
जूठे बर्तन धोने से ‘डोसा किंग’ तक
जयराम बनान की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उनकी शुरुआत किसी बड़े कारोबारी परिवार या भारी पूंजी से नहीं हुई थी। 18 रुपये महीने की नौकरी से रेस्टोरेंट कारोबार सीखने वाले बनान ने उसी अनुभव को अपने व्यवसाय में इस्तेमाल किया। सागर रत्ना आगे चलकर दक्षिण भारतीय शाकाहारी भोजन के लिए पहचाना जाने वाला ब्रांड बना। उन्हें ‘डोसा किंग’ के नाम से भी जाना जाता है। उनकी यात्रा दिखाती है कि छोटी शुरुआत और सीमित संसाधन आगे बढ़ने की राह में अंतिम सीमा नहीं होते।