मध्यप्रदेश के सागर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक दलित परिवार की बेटी को कथित तौर पर परेशान करने से मना करना पूरे परिवार पर भारी पड़ गया। आधी रात को कच्चे मकान में लगी आग ने दो नाबालिग बेटों की जान ले ली, जबकि बेटी जिंदगी और मौत से जूझ रही है। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।
आधी रात में कच्चे मकान में भड़की आग
यह सनसनीखेज मामला सागर जिले के नरयावली थाना क्षेत्र के ग्राम चंदामऊ का है। 5 दिसंबर की रात अचानक एक दलित परिवार के कच्चे मकान में भीषण आग लग गई। उस वक्त घर में तीन बच्चे सो रहे थे। आग इतनी तेजी से फैली कि बच्चों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। मकान में रखा पूरा घरेलू सामान जलकर खाक हो गया।
दो नाबालिग बेटों की इलाज के दौरान मौत
आग की चपेट में आए तीनों बच्चों को गंभीर हालत में बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान पहले 14 वर्षीय बेटे की मौत हो गई, जबकि देर रात 17 वर्षीय बड़े बेटे ने भी दम तोड़ दिया। परिवार की 23 वर्षीय बेटी करीब 60 प्रतिशत तक झुलस गई है और अस्पताल में उसका इलाज जारी है।
बेटी को परेशान करने का विरोध बना विवाद की जड़
पीड़ित परिवार का आरोप है कि गांव का ही रहने वाला युवक फईम खान उनकी छोटी बेटी को लंबे समय से परेशान कर रहा था। कई बार मना करने के बावजूद युवक अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। परिवार के विरोध करने पर कथित तौर पर आरोपी ने फोन पर जान से मारने की धमकी भी दी थी।
घर का दरवाजा बाहर से बंद कर लगाई आग!
परिजनों के मुताबिक, घटना वाली रात पिता खेत पर थे, जबकि मां और छोटी बेटी सागर शहर में एक कार्यक्रम में गई हुई थीं। इसी दौरान आरोपी ने घर का दरवाजा बाहर से बंद किया और कच्चे मकान में आग लगा दी। गहरी नींद में सो रहे बच्चों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका।
पीड़िता का दावा: आरोपी को भागते देखा
अस्पताल में भर्ती झुलसी बेटी ने पुलिस को दिए बयान में कहा है कि घटना की रात उसने आरोपी युवक को घर के पास से भागते हुए देखा था। पुलिस ने पीड़िता के बयान दर्ज कर लिए हैं और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
कार्रवाई की मांग, इलाके में आक्रोश
घटना के बाद अस्पताल और गांव में भारी आक्रोश देखा गया। सामाजिक संगठनों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं से मामले की जांच की जा रही है और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।