Saharanpur Masjid Dispute ---सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में शनिवार सुबह मस्जिद पर बुलडोजर कार्रवाई के बाद मामला गरमा गया। प्रशासन के मुताबिक विवादित जमीन सरकारी है और अदालत ने मस्जिद के निर्माण को अवैध मानते हुए परिसर खाली करने का आदेश दिया था। वहीं मस्जिद कमेटी इसे पुरानी वक्फ संपत्ति बताते हुए पुराने दस्तावेजों का हवाला देती रही है। इस पूरे विवाद में 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 565 रुपये की क्षतिपूर्ति भी अहम मुद्दा बनी हुई है।
कलेक्ट्रेट परिसर से शुरू हुआ जमीन का विवाद
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर करीब डेढ़ साल से कानूनी विवाद चल रहा था। प्रशासन का कहना था कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है। 16 जुलाई को सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह की अदालत ने जमीन को सरकारी मानते हुए निर्माण को अवैध घोषित किया और परिसर खाली करने का आदेश दिया। इसी आदेश में 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 565 रुपये की क्षतिपूर्ति भी तय की गई।
जिला अदालत से भी नहीं मिली राहत
सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने जिला अदालत में अपील की। 2 सितंबर को जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने अपील खारिज करते हुए पहले के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई की तैयारी तेज कर दी। दूसरी तरफ मस्जिद कमेटी का दावा रहा कि यह मस्जिद करीब 150 साल पुरानी है और जमीन को वक्फ संपत्ति माना जाना चाहिए।
पुराने दस्तावेजों और वक्फ दावे पर सवाल
मस्जिद पक्ष की ओर से पुराने दस्तावेजों का हवाला देते हुए दावा किया गया कि वहां लंबे समय से नमाज होती रही है। वक्फ से जुड़े दावे के साथ ‘वक्फ बाय यूजर’ का मुद्दा भी उठाया गया। वहीं प्रशासन का कहना रहा कि अदालत में इन दावों को जमीन पर कानूनी अधिकार साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना गया। इसी कानूनी स्थिति के आधार पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ी।
सुबह 4 बजे पहुंचा प्रशासन, 6 बजे शुरू हुआ एक्शन
शनिवार तड़के करीब 4 बजे कलेक्ट्रेट परिसर में कार्रवाई शुरू हुई। सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल और आरआरएफ की कंपनियां तैनात की गईं। कलेक्ट्रेट के गेट बंद कर आवाजाही रोक दी गई। करीब 6 बजे चार बुलडोजरों से मस्जिद के हिस्से को गिराने की कार्रवाई शुरू हुई। इसके बाद मलबा नगर निगम की गाड़ियों से हटाया जाने लगा।
इकरा हसन से ओवैसी और इमरान मसूद तक विरोध
कार्रवाई से पहले राजनीतिक हलचल भी तेज रही। कैराना सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोकने के लिए घर पर पुलिस तैनात कर हाउस अरेस्ट किया गया। इमरान मसूद और असदुद्दीन ओवैसी ने भी कार्रवाई पर सवाल उठाए और पुराने दस्तावेजों तथा वक्फ के दावे का मुद्दा उठाया। फिलहाल प्रशासन अदालत के आदेश को आधार बताते हुए कार्रवाई कर रहा है, जबकि मस्जिद पक्ष आगे कानूनी लड़ाई जारी रखने की बात कह रहा है।