Muzaffarnagar News: अधिवक्ता समेत सैफी हत्याकांड में 3 अभियुक्तों को फांसी की सजा एक अन्य अभियुक्त को 7 साल की कैद की सजा सुनाने वाले फास्टट्रैक कोर्ट (नंबर तीन) के पीठासीन अपर सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने इस मामले मे अपने जजमेंट में पुलिस द्वारा विवेचना में जानबूझकर अभियुक्तों को लाभ पहुंचाने के लिए कमियां छोड़ दी गई थी। उन्होंने इस संबंध में तत्कालीन विवेचक कोतवाली के निरीक्षक अनिल कप्परवान और पर्यवेक्षण अधिकारी सीओ सिटी के खिलाफ कार्रवाई को गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को लिखा है
विधिपूर्ण तरीके से विवेचना नही की गई
अपने जजमेंट में अपर सत्र न्यायाधीश ने लिखा कि प्रश्नगत प्रकरण में तत्कालीन विवेचक श्री अनिल कुमार कपरवान के द्वारा विवेचना में अभियुक्तगणों को अभियोजन की कमियों का लाभ देने के उद्देश्य साशय विधिपूर्ण तरीके से विवेचना नही की गई है। विवेचक अनिल कुमार कपरवान के द्वारा प्रश्नगत प्रकरण में सीसीटीवी फुटैज जो कि अत्यंत महत्त्वपूर्ण साक्ष्य थे, उन इलैक्ट्रानिक अभिलेखों के बाबत भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 के अनुरुप कार्यवाही नही की गई है। उल्लेखनीय है कि प्रश्नगत मामले के विवेचक अनिल कुमार कपरवान ने जिरह में यह कहा है कि कंट्रोल रूम से किसी पब्लिक के आदमी को कोई सीडी नही मिल सकती। सरकारी कंट्रोल रूम की कोई सीडी वादी ने मुझे लाकर नही दी। मैंने दौरान तफ्तीश वादी मुकदमा से यह नही पूछा कि यह तीन वीडियो सीडी जो आपने मुझे दी है यह सीसीटीवी कैमरों की हार्ड डिस्क से वीडियो सीडी में कहाँ और कौन-सी तारीख को तरमीम कराया है। इस बात को न पूछने की वजह नही थी, क्योंकि मेरे द्वारा स्वयं जहां सी.सी.टी.वी. कैमरे लगे थे वहां जाकर बयान अंकित किये गये थे।
समाप्ति केस डायरी के पर्चा संख्या 19 पर हुई
अपर सत्र न्यायाधीश ने जजमेंट में लिखा कि प्रश्नगत प्रकरण में विवेचक अनिल कुमार कपरवान का यह कर्तव्य था कि वह नियमानुसार विवेचना कर पुलिस कंट्रोल रुम से सीसीटीवी फुटैज प्राप्त करते और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 मे वर्णित प्रावधान के अनुरुप इलैक्ट्रानिक अभिलेख साक्ष्य में संकलित करते। यह तथ्य भी उल्लेखनीय है कि प्रश्नगत प्रकरण में विवेचना का प्रारंभ केस डायरी के पर्चा संख्या 01 से हुआ है तथा विवेचना की समाप्ति केस डायरी के पर्चा संख्या 19 पर हुई है।
पर्यवेक्षण अधिकारी के हस्ताक्षर नही हैं
केस डायरी के पर्चा संख्या 19 में पर्यवेक्षण अधिकारी के हस्ताक्षर नही है जिससे यह प्रतीत होताअतः प्रश्नगत प्रकरण में तत्कालीन विवेचक अनिल कुमार कपरवान तथा त्कालीन क्षेत्राधिकारी नगर जिनका नाम आरोप पत्र में वर्णित नहीं है, के रुद्ध समुचित जांच उपरान्त विभागीय कार्यवाही व अन्य वांछित कार्यवाही अपरिहार्य है। पीठासीन अपर सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने अपने इस आदेश की एक प्रति वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मुजफ्फरनगर एवम् अपर मुख्य सचिव, गृह, उत्तर प्रदेश शासन, लोक भवन, लखनऊ तथा पुलिस महानिदेशक, सिग्नेचर बिल्डिंग, गोमती नगर, लखनऊ को वाद लिपिक अविलम्ब नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही हेतु भेजना सुनिश्चित करें। उपरोक्त सूचना वाद लिपिक जरिये ई-मेल से भी संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार भेजना सुनिश्चित करें।