लखनऊ। प्रयागराज में आयोजित माघ मेला 2026 एक प्रमुख धार्मिक आयोजन है, जो 3 जनवरी से शुरू होकर 15 फरवरी तक चलेगा। इस मेले में लाखों श्रद्धालु संगम में स्नान करने आते हैं, साथ ही हजारों साधु-संत कल्पवास और तपस्या के लिए प्रवास करते हैं। हालांकि, इस बार मेले में प्रवास कर रहे करीब 150 साधु-संतों ने खुद को असुरक्षित महसूस करते हुए मेला पुलिस से व्यक्तिगत सुरक्षा की मांग की है। इन संतों ने जान का खतरा बताते हुए एसपी मेला को पत्र लिखकर गनर उपलब्ध कराने की अपील की है।
90 साधु संतों को मिली सुरक्षा
मेला पुलिस के अनुसार इन आवेदनों में बताए गए कारणों का सत्यापन गोपनीय तरीके से किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को स्थानीय खुफिया इकाई (एलआईयू) को सौंपा गया है। एलआईयू यह जांच कर रही है कि किन साधु-संतों को वास्तव में खतरा है और सुरक्षा की आवश्यकता है। रिपोर्ट के आधार पर अब तक लगभग 90 साधु-संतों को व्यक्तिगत सुरक्षा प्रदान की जा चुकी है, जबकि शेष आवेदनों पर कार्रवाई रिपोर्ट आने के बाद की जाएगी।यह स्थिति पिछले वर्षों की तरह है, जहां कुंभ या माघ मेले में साधु-संतों द्वारा सुरक्षा मांगना आम रहा है।
रहती है अखाड़ों की आपसी रंजिश
संतों के बीच संपत्ति विवाद, अखाड़ों की आपसी रंजिश या अन्य कारणों से खतरे की आशंका रहती है, जिससे वे सशस्त्र गनर की मांग करते हैं। मेले में 65 से अधिक शिविरों की सामान्य सुरक्षा के लिए होमगार्ड पहले से तैनात हैं। माघ मेला प्रशासन ने समग्र सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाया है। मेले में 10 हजार से अधिक पुलिसकर्मी, एटीएस कमांडो, पीएसी, एनडीआरएफ टीमें तैनात हैं। 400 से अधिक एआई आधारित सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन, वाच टावर और इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल रूम से 24 घंटे निगरानी की जा रही है।
संतों की सुरक्षा प्राथमिकता
प्रमुख स्नान पर्वों पर लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा को किला बना दिया गया है। यह आयोजन न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि प्रशासन की चुनौती भी, जहां संतों की सुरक्षा के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। एलआईयू की जांच से वास्तविक जरूरतमंद संतों को सुरक्षा मिलेगी, जिससे मेला शांतिपूर्ण और दिव्य रहेगा।