Sajjan Kumar Delhi Riots Case-1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामले में दोषी ठहराए गए कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का 81 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे सज्जन कुमार की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था। गुरुवार को इलाज के दौरान उन्होंने आखिरी सांस ली। उनके खिलाफ दंगा और हत्या से जुड़े कई मामलों में कानूनी कार्रवाई हुई थी।
अस्पताल में इलाज के दौरान निधन
सज्जन कुमार तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। तबीयत खराब होने के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। वह 81 वर्ष के थे। उनका नाम 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में लंबे समय से सामने आता रहा था। दंगों के दौरान हुई हिंसा को लेकर उनके खिलाफ अलग-अलग स्तर पर कानूनी कार्रवाई चली।
पिता-पुत्र की हत्या के मामले में दोषी
सज्जन कुमार को दिल्ली के सरस्वती विहार इलाके में हुई पिता-पुत्र की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। यह घटना 1 नवंबर 1984 की बताई गई है। मामले में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरनदीप सिंह की हत्या हुई थी। अदालत ने सज्जन कुमार को भीड़ को उकसाने का दोषी माना था। इस मामले में 17 दिसंबर 2018 को उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
एक और मामले में भी हुई थी दोषसिद्धि
सज्जन कुमार को 12 फरवरी को एक अन्य 1984 दंगा मामले में भी दोषी ठहराया गया था। इस मामले में दंगा करने, गैर-कानूनी तरीके से एकत्र होने और हत्या समेत कई धाराओं के तहत उन्हें दोषी माना गया था। इसके बाद 2025 में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने भी 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामले में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सज्जन कुमार ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया था।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित थी अपील
सजा के खिलाफ सज्जन कुमार की अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित थी। उनकी ओर से अदालत में दोषसिद्धि और सजा को चुनौती दी गई थी। हालांकि, इस कानूनी प्रक्रिया के बीच ही उनका निधन हो गया। 1984 के दंगों से जुड़े मामलों में अदालतों के अलग-अलग फैसलों के बाद सज्जन कुमार को लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा।
तीन बार लोकसभा सांसद रहे
सज्जन कुमार कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे और तीन बार लोकसभा सांसद चुने गए थे। उन्होंने बाहरी दिल्ली लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया था। बाद में इस क्षेत्र का परिसीमन हुआ। 2018 में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। अब 81 वर्ष की उम्र में उनके निधन के बाद 1984 दंगा मामले से जुड़े उनके खिलाफ चल रहे कानूनी घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया।