विजय हजारे ट्रॉफी में बिहार के कप्तान सकीबुल गनी ने ऐसा धमाका किया, जिसने पूरे घरेलू क्रिकेट को चौंका दिया। अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ खेले गए मुकाबले में सकीबुल गनी ने महज 32 गेंदों में शतक जड़कर लिस्ट ए क्रिकेट में सबसे तेज शतक लगाने वाले भारतीय बन गए। उनकी यह पारी सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं थी, बल्कि बिहार क्रिकेट की ताकत का ऐलान भी थी। 40 गेंदों पर नाबाद 128 रन बनाते हुए गनी ने 10 चौके और 12 छक्के लगाए और 320 के विस्फोटक स्ट्राइक रेट से रन बरसाए। मैदान पर हर गेंद पर तबाही लिखी जा रही थी और गेंदबाज पूरी तरह बेबस नजर आए।
मोतिहारी से रिकॉर्ड तक
सकीबुल गनी का जन्म 2 सितंबर 1999 को बिहार के मोतिहारी में हुआ था। 26 साल के इस खिलाड़ी ने पिछले तीन चार सीजन से बिहार क्रिकेट को नई पहचान दी है। विजय हजारे ट्रॉफी, सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी और रणजी ट्रॉफी में लगातार शानदार प्रदर्शन के चलते वह टीम के भरोसेमंद खिलाड़ी बने। हाल ही में उन्हें बिहार की सैयद मुश्ताक अली टीम का उपकप्तान भी बनाया गया था। अरुणाचल के खिलाफ आई यह पारी उनके निरंतर प्रदर्शन का ही नतीजा मानी जा रही है, जिसने दिखा दिया कि बिहार का यह बल्लेबाज बड़े मंच के लिए पूरी तरह तैयार है।
संघर्ष से स्टार तक
सकीबुल गनी का क्रिकेट सफर आसान नहीं रहा। उनकी औपचारिक ट्रेनिंग एक लोकल क्रिकेट एकेडमी से शुरू हुई, जहां उन्होंने अपनी तकनीक को निखारा। अंडर 19 टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन के बाद चयनकर्ताओं की नजर उन पर पड़ी और उन्हें राज्य टीम में मौका मिला। अंडर 19 वर्ल्ड कप में भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद गनी की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर बनी। दबाव में खेलने की उनकी क्षमता और ऑलराउंड स्किल्स ने घरेलू क्रिकेट में उन्हें खास बना दिया। वह दाएं हाथ के बल्लेबाज होने के साथ मीडियम फास्ट गेंदबाजी में भी उपयोगी साबित हुए हैं।
इसे भी पढ़ें : 36 गेंदों में शतक, 190 रनों का तूफान, Vaibhav Suryavanshi ने हिला दिया क्रिकेट, रिकॉर्ड भी कांप उठे
रणजी से विजय हजारे तक
सकीबुल गनी ने रणजी ट्रॉफी में अपने डेब्यू मैच में ही इतिहास रच दिया था। मिजोरम के खिलाफ पहले ही मैच में उन्होंने 341 रन की ऐतिहासिक पारी खेली थी, जिसमें 56 चौके शामिल थे। अब तक वह 28 फर्स्ट क्लास मैचों में 2035 रन बना चुके हैं, जिसमें 5 शतक और 8 अर्धशतक शामिल हैं। लिस्ट ए क्रिकेट में भी 33 मैचों में 867 रन उनके नाम हैं। विजय हजारे ट्रॉफी में 32 गेंदों का शतक उनके करियर का नया मील का पत्थर है। मोतिहारी से निकलकर राष्ट्रीय चर्चा तक पहुंचा यह खिलाड़ी आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट के लिए बड़ा नाम बन सकता है