How to Perform Aarti: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के बाद आरती करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। आमतौर पर लोग आरती के समय दीपक को भगवान के सामने घुमाते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि शास्त्रीय परंपराओं में इसके लिए एक विशेष क्रम भी बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आरती सिर्फ दीपक घुमाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि भगवान के अलग-अलग अंगों के सामने तय संख्या में दीप दिखाने की भी परंपरा है। हाल ही में अभिनेता सलमान खान का एक वीडियो चर्चा में आया, जिसमें वह गणपति पूजा के दौरान आरती करते नजर आए। बताया गया कि आरती करते वक्त वह दीपक विपरीत दिशा में घुमा रहे थे। यह देखते ही उनकी बहन अर्पिता खान ने उन्हें सही तरीका बताया। इसके बाद सलमान ने उसी अनुसार आरती पूरी की।
आरती की शुरुआत चरणों से करने की परंपरा
श्रीमद् एकलिंगमाहात्म्यम् में आरती की एक पारंपरिक विधि का उल्लेख मिलता है। इसके अनुसार सबसे पहले भगवान के चरणों के सामने दीपक घुमाया जाता है। चरणों के पास दीपक चार बार घुमाने की बात कही गई है। धार्मिक दृष्टि से इसे भगवान के चरणों में श्रद्धा अर्पित करने का प्रतीक माना जाता है।
नाभि के सामने कितनी बार दीपक घुमाएं?
चरणों के बाद आरती का अगला क्रम भगवान की नाभि का आता है। यहां दीपक दो बार घुमाने का उल्लेख मिलता है। धार्मिक परंपरा में नाभि को सृष्टि और जीवन के केंद्र से जोड़कर देखा जाता है। भगवान विष्णु की नाभि से ब्रह्मा जी के प्रकट होने की पौराणिक कथा भी इसी मान्यता से जुड़ी है।
भगवान के मुख की आरती एक बार
इसके बाद दीपक भगवान के मुख के सामने लाया जाता है। यहां एक बार आरती करने की परंपरा बताई गई है। इस दौरान भक्त भगवान के स्वरूप का ध्यान करते हुए अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं।
आखिर में पूरे स्वरूप की आरती
आरती के अंतिम चरण में भगवान के पूरे शरीर या संपूर्ण स्वरूप के सामने दीपक घुमाया जाता है। शास्त्रीय वर्णन के अनुसार ऐसा सात बार किया जाता है। इस तरह चरणों के चार, नाभि के दो, मुख के एक और पूरे स्वरूप के सात चक्र मिलाकर कुल14 बार दीपक घुमाने की परंपरा बताई गई है। धार्मिक मान्यता में इसे चौदह भुवनों तक भगवान के प्रति भक्ति और समर्पण पहुंचने के प्रतीक के रूप में समझा जाता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।