बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद अब सम्राट चौधरी राज्य के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। एनडीए की बैठक में उन्हें सर्वसम्मति से नेता चुना गया, जिसके बाद यह तय हो गया कि अब बिहार की कमान उनके हाथों में होगी। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा और सभी नेताओं ने समर्थन दिया।
शपथ की तैयारी पूरी
सम्राट चौधरी बुधवार सुबह 11 बजे लोकभवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस मौके पर कई बड़े नेता मौजूद रहेंगे। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर्यवेक्षक के तौर पर पटना पहुंचे थे। इसके अलावा संगठन के कई बड़े चेहरे भी बैठक में शामिल हुए। इससे साफ है कि पार्टी ने पूरी रणनीति के साथ उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है।
RJD से शुरू हुआ सफर
सम्राट चौधरी की राजनीतिक यात्रा काफी उतार-चढ़ाव भरी रही है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत आरजेडी से की थी और लालू प्रसाद यादव के करीबी माने जाते थे। 1999 में वह राबड़ी देवी सरकार में कृषि मंत्री भी रहे। लंबे समय तक आरजेडी में रहने के बाद उन्होंने नया रास्ता चुना और राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।
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JDU से BJP तक का रास्ता
साल 2014 में सम्राट चौधरी जेडीयू में शामिल हुए और जीतन राम मांझी की सरकार में मंत्री बने। इसके बाद 2018 में उन्होंने बीजेपी का दामन थामा और तेजी से पार्टी में अपनी जगह मजबूत की। बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बनने से लेकर उपमुख्यमंत्री तक का सफर उन्होंने मेहनत और रणनीति के दम पर तय किया।
परिवार से मिली सियासत
सम्राट चौधरी का जन्म मुंगेर जिले में हुआ और वह एक राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी समता पार्टी के संस्थापकों में से एक थे और बिहार की राजनीति में उनका बड़ा नाम रहा है। इसी वजह से सम्राट को बचपन से ही राजनीति का माहौल मिला और उन्होंने इसे अपने करियर के रूप में चुना।
अब बड़ी जिम्मेदारी
अब जब सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं, तो उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां भी होंगी। जनता को उनसे नई उम्मीदें हैं और विकास की रफ्तार को तेज करने की जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर होगी। उनका अब तक का सियासी सफर संघर्ष और बदलाव से भरा रहा है, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होने जा रही है।