करीब चार महीने पहले संजू सैमसन भारतीय टी20 टीम की बड़ी ताकत माने जा रहे थे। वह विश्व कप जीतने वाली टीम का हिस्सा थे और शानदार प्रदर्शन के बाद सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी भी चुने गए। तब लग रहा था कि संजू ने टीम में अपनी जगह पक्की कर ली है। लेकिन कुछ ही महीनों में हालात पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं।
इंग्लैंड दौरे पर कभी अंदर कभी बाहर
इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में संजू को लगातार मौके नहीं मिले। वह कभी अंतिम ग्यारह से बाहर रहे तो सीरीज हाथ से निकलने के बाद आखिरी मुकाबले में उनकी वापसी हुई। इसी फैसले ने सवाल खड़ा किया कि अगर संजू भविष्य की योजना का हिस्सा हैं तो उन्हें शुरुआत से लगातार मौका क्यों नहीं दिया गया?
जिम्बाब्वे टीम से बाहर होने पर बढ़े सवाल
सबसे बड़ा संकेत जिम्बाब्वे दौरे के लिए चुनी गई भारतीय टीम से मिला। तीन टी20 मैचों की सीरीज में संजू सैमसन को जगह नहीं दी गई। दूसरी तरफ 15 साल के वैभव सूर्यवंशी पर चयनकर्ताओं ने फिर भरोसा जताया। इससे साफ नजर आता है कि टीम प्रबंधन अब युवा खिलाड़ियों को भविष्य के लिए तैयार करना चाहता है।
क्या सिर्फ जरूरत पर याद आते हैं संजू?
संजू के साथ लंबे समय से यही कहानी चलती रही है। कभी उन्हें टीम में मौका मिलता है तो कभी अचानक बाहर कर दिया जाता है। लगातार मुकाबले नहीं मिलने से उनकी भूमिका भी साफ नहीं हो पाती। मौजूदा फैसलों को देखकर सवाल उठ रहा है कि क्या संजू अब पहली पसंद नहीं बल्कि जरूरत पड़ने पर बुलाए जाने वाले खिलाड़ी बन गए हैं?
युवा खिलाड़ियों पर बढ़ रहा टीम का भरोसा
भारतीय टीम अगले कई वर्षों को ध्यान में रखकर नई टी20 टीम तैयार करती नजर आ रही है। वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ियों को लगातार मौके देना इसी योजना का हिस्सा माना जा रहा है। ऐसे में संजू फिलहाल इस योजना के केंद्र में नजर नहीं आ रहे हैं और यही उनके लिए सबसे बड़ी चिंता है।
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संजू के लिए वापसी का रास्ता अभी खुला
हालांकि संजू सैमसन का सफर खत्म मान लेना जल्दबाजी होगी। क्रिकेट में एक शानदार पारी पूरी तस्वीर बदल सकती है। लेकिन फिलहाल टीम इंडिया के फैसले यही संकेत दे रहे हैं कि संजू पहली पसंद नहीं हैं। अब उन्हें मौका मिलने पर ऐसा प्रदर्शन करना होगा जो चयनकर्ताओं को फिर से उन पर भरोसा करने के लिए मजबूर कर दे।