
जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने 35 साल पुराने एक दर्दनाक केस की जांच फिर से शुरू की है. यह मामला 1990 में हुई कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट की हत्या से जुड़ा है, जिसने उस समय पूरी घाटी को हिला दिया था. मंगलवार को SIA की टीम ने श्रीनगर में कई जगहों पर छापेमारी की. ये एक ऐसा केस था जिसने न केवल कश्मीरी पंडितों में दहशत फैला दी बल्कि पूरे देश में इसकी निंदा की गई.
कौन थीं सरला भट्ट?
सरला भट्ट जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के काजीबाग इलाके की रहने वाली थीं. वह शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में नर्स के तौर पर काम करती थीं. 14 अप्रैल 1990 को जब वह हॉस्टल में थीं तभी जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के आतंकियों ने उन्हें पुलिस मुखबिर होने का आरोप लगाकर अगवा कर लिया. पांच दिन बाद श्रीनगर में उनकी गोलियों से छलनी लाश मिली. पोस्टमॉर्टम से पता चला कि उनके साथ रेप भी हुआ था. इस घटना ने कश्मीरी पंडित समुदाय में दहशत फैला दी थी.
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क्यों फिर से खुला मामला?
सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में एक याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें कश्मीरी पंडितों की हत्याओं की जांच की मांग की गई थी. कोर्ट ने कहा था कि 27 साल बाद सबूत मिलने की संभावना बहुत कम है. 2023 में भी क्यूरेटिव याचिका खारिज कर दी गई. लेकिन उसी साल, जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने न्यायमूर्ति नीलकंठ गंजू हत्याकांड को फिर से खोला और इशारा दिया कि बाकी मामलों की भी जांच होगी. गंजू की 1989 में आतंकियों ने हत्या की थी, क्योंकि उन्होंने JKLF के संस्थापक मकबूल भट्ट को मौत की सजा सुनाई थी.
कश्मीरी पंडितों पर हमलों का आंकड़ा
जम्मू-कश्मीर पुलिस के 2008 के सर्वे के मुताबिक, 1989 के बाद से आतंकियों ने 209 कश्मीरी पंडितों की हत्या की. इनमें से 109 हत्याएं 1990 में हुईं. इसमें लगभग 140 मामले पुलिस स्टेशनों में दर्ज हैं, सिर्फ 24 मामलों में चार्जशीट दाखिल हुई है और 115 अपराधियों की पहचान अब भी नहीं हुई. कश्मीरी पंडित समुदाय का दावा है कि असली संख्या पुलिस के आंकड़ों से भी ज्यादा है.