
सर्व पितृ अमावस्या, जिसे महालय अमावस्या भी कहा जाता है, आश्विन मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। यह दिन विशेष रूप से उन पितरों के लिए होता है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती या जिनका श्राद्ध किसी कारणवश नहीं किया जा सका हो। इस दिन श्रद्धा और भावना से पितरों को तर्पण, पिंडदान और दान करने से उन्हें तृप्ति मिलती है और वे अपने लोक की ओर प्रसन्न होकर लौटते हैं। 2025 में यह शुभ तिथि पितरों की कृपा प्राप्त करने का एक अनमोल अवसर है।
क्या कहते हैं हिन्दू शास्त्र
हिंदू शास्त्रों में वर्णित है कि अगर इस दिन व्यक्ति अपनी राशि के अनुसार दान करता है तो इसका फल कई गुना अधिक होता है और वह पितरों की विशेष कृपा प्राप्त करता है। मेष राशि के जातकों को लाल वस्त्र, मसूर की दाल और तांबे के बर्तन दान करने चाहिए। वृषभ राशि के लिए सफेद वस्त्र, चावल और घी का दान उत्तम माना गया है। मिथुन राशि के लोग किताबें, लेखन सामग्री और मूंग दाल दान करें। कर्क राशि वालों को दूध, चांदी और सफेद मिठाइयों का दान करना चाहिए।
राशि के अनुसार दान
सिंह राशि के लिए गुड़, गेहूं और तांबे का पात्र दान करना शुभ होता है। कन्या राशि के जातकों को सत्तू, हरे वस्त्र और हरी मूंग दान करनी चाहिए। तुला राशि के लिए इत्र, श्रृंगार सामग्री और वस्त्रों का दान फलदायी होता है। वृश्चिक राशि के जातकों को काले तिल, तेल और कंबल का दान करना चाहिए। धनु राशि के लिए पीले वस्त्र, हल्दी और बेसन का दान श्रेष्ठ है। मकर राशि के लिए कंबल, लोहा और उड़द की दाल का दान शुभ फल देता है। कुंभ राशि वालों को नीले वस्त्र और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का दान करना चाहिए, जबकि मीन राशि के जातकों को मछलियों को आटा डालना, चावल और जल का दान करना लाभकारी होता है।
जल और तिल अर्पित करें
इस दिन प्रातः काल स्नान करके पवित्र भाव से पितरों को जल और तिल अर्पित करें, फिर ज़रूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या दक्षिणा दें। इससे पितर प्रसन्न होकर कुल पर अपनी कृपा बरसाते हैं, जिससे घर-परिवार में शांति, समृद्धि और सुख-शांति का वास होता है। सर्व पितृ अमावस्या केवल एक धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का श्रेष्ठ दिन है।