उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले की जामा मस्जिद गली में रहने वाले मोहम्मद ताहिर और खालिद के घर आज खुशी का माहौल है. उनकी बहन शबाना, जो 2018 में लापता हो गई थीं, सात साल बाद सकुशल घर लौट आई हैं. परिवार ने उन्हें मृत मानकर अंतिम संस्कार तक कर दिया था.
लापता से नारी निकेतन तक का सफर
शबाना साल 2018 में एक रिश्तेदार के घर गई थीं, लेकिन वहीं से अचानक गायब हो गईं. खोजबीन और पुलिस कार्रवाई के बाद भी कोई सुराग न मिलने पर परिवार ने हार मान ली थी. उसी साल शबाना पीलीभीत के अमरिया क्षेत्र में मानसिक रूप से अस्वस्थ अवस्था में मिलीं और उन्हें नारी निकेतन, बरेली भेजा गया.
इलाज ने लौटाई पहचान की रोशनी
2022 में शबाना को बरेली मानसिक चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, जहां डॉ. आलोक शुक्ला की देखरेख में इलाज शुरू हुआ. अस्पताल की निदेशक डॉ. पुष्पा पंत त्रिपाठी ने ‘मनोसमर्पण’ संस्था से संपर्क किया, जिससे बदलाव की शुरुआत हुई.
‘मनोसमर्पण’ बना पुनर्मिलन की कड़ी
संस्था के प्रमुख शैलेश शर्मा ने शबाना की काउंसलिंग की, जिससे वह अपना नाम और घर याद कर सकीं. भाइयों से संपर्क होने पर पहले तो उन्हें विश्वास नहीं हुआ, लेकिन जब उन्होंने बहन को पहचाना तो भावुक मिलन का दृश्य सामने आया.
इंसानियत की जीत और परिवार की पुनर्प्राप्ति
जरूरी औपचारिकताओं के बाद शबाना को परिवार को सौंप दिया गया. शैलेश शर्मा अब तक 700 से अधिक लोगों को उनके घर पहुंचा चुके हैं और बरेली में ‘बजरंगी भाईजान’ के नाम से प्रसिद्ध हैं. यह कहानी दर्शाती है कि सेवा, धैर्य और संवेदना से खोया हुआ फिर पाया जा सकता है.