मध्य प्रदेश के सतना जिले में रक्षाबंधन के दूसरे दिन मनाए जाने वाले कजलिया पर्व के दौरान दो अलग-अलग हादसों में तीन लोगों की मौत हो गई। एक घटना प्रसिद्ध धारकुंडी आश्रम के पास अघमर्षण कुंड में हुई, जबकि दूसरी सिंहपुर इलाके की एक स्थानीय नदी में घटी। त्योहार की उमंग में निकले लोग कुछ ही पलों में हादसे का शिकार हो गए, जिससे पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
तालाब में डूबने से दो की मौत
रविवार को अमन त्रिपाठी (24), उनके भतीजे अजय पांडे (18) और एक रिश्तेदार अघमर्षण कुंड में स्नान करने पहुंचे थे। बारिश के चलते तालाब पानी से लबालब भरा था। स्नान के दौरान तीनों गहराई में चले गए और डूबने लगे। वहां मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन अमन और अजय को नहीं बचाया जा सका। तीसरे व्यक्ति को स्थानीय लोगों ने बाहर निकाल लिया और उसकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है।
नदी में बह गया तीसरा युवक
दूसरी घटना सिंहपुर क्षेत्र की एक नदी में हुई। 36 वर्षीय योगेंद्र कुशवाहा कजलिया पर्व के दौरान नदी में ‘कजलियां’ डाल रहे थे, तभी उनका संतुलन बिगड़ गया और वे पानी में गिर गए। गहरे पानी और तेज बहाव के कारण वे डूब गए। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की टीम ने घंटों के प्रयास के बाद उनका शव बाहर निकाला।
कजलिया पर्व का महत्व
कजलिया, जिसे भुजरिया या भुजलिया भी कहा जाता है, बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्रों में रक्षाबंधन के दूसरे दिन मनाया जाने वाला पारंपरिक त्योहार है। इस अवसर पर लोग तालाबों और नदियों में ‘कजलियां’ प्रवाहित करते हैं, जो भाई-बहन के रिश्ते और फसल की समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।