Satua Baba: महाकुंभ-2025 से वायरल हुई हर्षा रिछारिया के सनातन धर्म छोड़ने वाले बयान पर सतुआ बाबा ने पलटवार किया है। खाक चौक व्यवस्था समिति के प्रधानमंत्री संतोषानंद यानी सतुआ बाबा ने कहा कि सनातन न कोई छोड़ सकता है और न ही कोई पकड़ सकता है। ऐसे लोग पाकिस्तान और बांग्लादेश के एजेंट हैं। यह लोग सोशल मीडिया पर सस्ती लोकप्रियता के लिए यह सब करते हैं।
'जो भारत में पैदा हुआ है, वह जन्म से सनातनी है'
जगद्गुरू विष्णु स्वामी संप्रदाय के आचार्य संतोषानंद सतुआ बाबा ने कहा कि जो भारत में पैदा हुआ है, वह जन्म से सनातनी है। जो सनातन छोड़ने की बात करते हैं, वह बहुरूपिया की तरह काम करते हैं। ऐसे लोग पाकिस्तान-बांग्लादेश के एजेंट हैं। उन्हें संभल जाना चाहिए। सनातन धर्म जन्म लेते ही हमारी रगों में दौड़ने लगता है। उन्होंने कहा कि जब से देश में नरेंद्र मोदी और यूपी में योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभाली है, देश में युवा पीढ़ी तेजी से आगे बढ़ी है। आज युवाओं को अच्छी शिक्षा, चिकित्सा और रोजगार मिल रहा है। सतुआ बाबा ने कहा कि माघ मेले में सकारात्मकता को साथ लेकर जाएं. नकारात्मकता को यहीं छोड़ दें। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर दोनों तरह का बाजार है। अच्छी चीजें भी उपलब्ध हैं और खराब चीजें भी हैं। यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह उसका सकारात्मक उपयोग करता है या नकारात्मक।
माघ मेला आध्यात्म का अमृतोत्सव
सतुआ बाबा ने कहा कि माघ मेला आध्यात्म का बहुत बड़ा सनातनी आयोजन है. यह बहुत बड़ी आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र है. यहां लोग कल्पवास करते हैं. लाखों साधु-संत रोज प्रवचन करते हैं। ऐसे में यहां सकारात्मकता को अपनाना चाहिए। जो नकारात्मकता सोशल मीडिया पर सनातन धर्म को लेकर फैलाई जा रही है, उससे दूर रहना चाहिए। मेरा मानना है कि माघ मेला धर्म और आध्यात्म का अमृतोत्सव है। सतुआ बाबा का कहना है कि संतों को डिजिटल मीडिया पर जिस तरह से दिखाया जा रहा है, उसके भी दो पहलू हैं। सनातक धर्म को डिजिटल मीडिया पर बदनाम करने की साजिश चल रही हैं। सनातन के खिलाफ सदियों से साजिशें चलती रही हैं। सनातन धर्म न कभी खत्म हुआ है और न ही होगा।
मकर संक्रांति पर विशेष ग्रहीय स्थितियां
सतुआ बाबा ने कहा कि माघ मेला तीर्थराज प्रयागराज में हमेशा से संतों ने विश्व को जोड़ने का संदेश दिया है। इस बार भी मकर संक्रांति का पर्व विशेष ग्रहीय स्थितियों में मनाया जाएगा, जो कि एक अलग ही ऊर्जा और पुण्य देने वाला है। सनातन को मानने वाला हर सनातनी मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या का स्नान करने की इच्छा रखता है। ऐसे में प्रशासनिक तैयारियों के साथ ही साथ साधु–संतों ने भी अपने शिविरों में श्रद्धालुओं के ठहरने, भोजन आदि का व्यापक प्रबंध किया है। आने वाले भक्तों के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं। इस बार माघ मेले में सनातन के प्रति लोगों की आस्था और विश्वास बढ़ा है. यह बहुत अच्छे संकेत हैं। प्रशासन ने माघ मेले को दिव्य और भव्य बनाने के लिए विशेष तैयारियां की हैं।
योगी आस्था और मोदी विश्वास के सूर्य
सतुआ बाबा ने कहा कि सबको विश्वास है कि हमारे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आध्यात्म के सूर्य हैं. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्वास के सूर्य हैं। दोनों का संगम आस्था और विश्वास का प्रतीक है।
ऐसे में करोड़ों श्रद्धालु संगम में आकर मौनी अमावस्या और मकर संक्रांति को स्नान करेंगे। यह अपने आप में दिव्य है। यहां उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रद्धालुओं के लिए उत्तम व्यवस्था कर रखी है। साधु संन्यासी भी मौनी और मकर स्नान के लिए तैयार हैं।
कौन हैं सतुआ बाबा
संतोषानंद सतुआ बाबा जगद्गुरु विष्णु स्वामी संप्रदाय के आचार्य हैं। वह खाक चौक सेवा समिति के प्रधानमंत्री का भी दायित्व निभा रहे हैं। माघ मेला तथा कुंभ जैसे आयोजनों में उनकी सक्रिय भूमिका रहती है। खाक चौक व्यवस्था समिति के प्रधानमंत्री के रूप में वह संत समाज और प्रशासन के बीच समन्वय का काम भी करते हैं। धार्मिक आयोजनों की व्यवस्था, संतों के हित और सनातन परंपराओं को लेकर वह अक्सर मुखर रहते हैं. सतुआ बाबा सीएम योगी आदित्यनाथ के करीबी माने जाते हैं। सतुआ बाबा अपने बेबाक बयानों के कारण कई बार विवादों में भी रहे हैं। खासकर सोशल मीडिया, धर्मांतरण और सनातन पहचान जैसे मुद्दों पर उनके तीखे वक्तव्य चर्चा में रहे हैं। आलोचक उन्हें कठोर भाषा के लिए घेरते हैं, जबकि समर्थकों का मानना है कि वह सनातन परंपरा की स्पष्ट और निडर आवाज हैं।
3 करोड़ की डिफेंडर कार को लेकर बहस छिड़ी
माघ मेला और कुंभ के दौरान व्यवस्था, संतों की भूमिका और धार्मिक मूल्यों को लेकर उनके बयान अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। हाल ही में उनकी 3 करोड़ की डिफेंडर कार को लेकर सोशल मीडिया में बहस छिड़ी थी। उनका माघ मेले में डिफेंडर कार छोड़कर ठेले पर चलने का वीडियो वायरल हुआ था। इसके अलावा जमीन आवंटन के दौरान सतुआ बाबा नाराज हो गए थे, जिसे मनाने के लिए प्रयागराज का पूरा प्रशासनिक अमला लगा हुआ था।
धूनी पर रोटी सेंकने का वीडियो भी खूब वायरल हुआ
प्रयागराज के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा का बाबा के शिविर में धूनी पर रोटी सेंकने का वीडियो भी खूब वायरल हुआ था। इस पर यूजर्स ने तरह-तरह के कमेंट किए थे। ज्यादातर का यही कहना था कि जब बात सीएम योगी आदित्यनाथ के करीबी बाबा की हो तो डीएम को रोटी सेंकनी ही पड़ती है। इस पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी डीएम पर कटाक्ष किया था। केशव ने कहा था कि आप सतुआ बाबा की रोटी सेंकने के चक्कर में ज्यादा न पड़ो। शहर में जाम लग रहा है उसे देखो।
सतुआ बाबा की निगरानी में लग्जरी बोट
वाराणसी में मणिकर्णिका घाट के ठीक सामने गंगा उस पार एक लग्जरी बोट खड़ी है. 2018 में वाराणसी के गंगा उस पार सतुआ बाबा आश्रम क्षेत्र में मुरारी बापू की कथा के दौरान इसका निर्माण करवाया गया था। करोड़ों रुपए खर्च करके दो मंजिला यह मोटर बोट बनाई गई थी, जो लग्जरी सुविधाओं से लैस है। वर्तमान में यह बोट सतुआ बाबा की निगरानी में ही रहती है। इस बेहद खास बोट का नाम कैलाशा है। अपनी कथा के दौरान मुरारी बापू 7 दिनों के काशी प्रवास में इसी बोट में रुके थे।
हर्षा रिछारिया ने क्या बयान दिया
हर्षा रिछारिया ने कहा कि 'प्रयागराज महाकुंभ-2025 से शुरू हुई यह कहानी जो अब खत्म हो रही है। इस एक साल में मैंने बहुत सारी दिक्कतों का सामना किया। प्रयागराज से शुरू हुआ यह विरोध लगा कि महाकुंभ के बाद ठीक होगा, लेकिन मैंने जो कुछ भी करने की कोशिश की धर्म के रास्ते पर चलते हुए उसका विरोध हुआ। मैं क्या कर रही थी? मैं क्या कोई गलत काम नहीं कर रही थी। मैं चोरी नहीं कर रही थी। मैं लूटपाट नहीं कर रही थी। मैं बलात्कार नहीं कर रही थी। मैं धर्म के रास्ते पर चलते हुए जो कुछ भी कर रही थी, उसे बार-बार रोका गया। मेरा मनोबल बार-बार तोड़ा गया।'
महाकुंभ से धर्म को धंधा बनाकर मैं करोड़ों रुपए छाप लिए
'जिनको लगता है कि महाकुंभ से धर्म को धंधा बनाकर मैं करोड़ों रुपए छाप लिए, मैं आज बहुत उधारी में हूं। धर्म में आने से पहले जब मैं एंकरिंग कर रही थी तो मैं एक प्राऊडी एंकर थी। मैं बहुत गर्व से बोलती हूं कि मेरा प्रोफेशन बहुत अच्छा था। मैं बहुत अच्छा कर रही थी। देश से ज्यादा विदेश में काम करके मैं अच्छा खासा पैसा कमा रही थी। मैं उसमें रहकर बहुत खुश थी. यहां आने के बाद सिर्फ उधारी के अलावा कुछ नहीं बचा मेरे साथ। सबसे बड़ी बात किसी का साथ भी नहीं है। आज मैं यह सब क्यों आपको बोल रही हूं, क्योंकि लगातार एक साल में जो कुछ भी कुछ भी काम करने का प्रयास किया है, उसे रोका गया है।'
जितना कुछ करना था मैंने कर लिया, अब बस बहुत हुआ
'उसमें विरोध उत्पन्न किए गए और यही चीज इस बार माघ मेले में भी हुई है। जिसकी वजह से मैं ज्यादा आहत हूं, लेकिन मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया जिसके नाते मेरा विरोध किया जाए। विरोध करना... शायद मेरे देश में यही एक चीज सबसे आसान है, एक लड़की के साथ. अगर आप उसका मनोबल नहीं तोड़ पा रहे हो तो उसका चरित्र हनन करो। तब तो वह टूटेगी ही। तो भाई आप अपना धर्म अपने पास रखिए। मैं कोई मां सीता नहीं हूं कि मैं अग्नि परीक्षा दूंगी। एक साल से जितनी परीक्षाएं देनी थी, जितना कुछ करना था मैंने कर लिया. अब बस बहुत हुआ।'
धर्म पर चलने का संकल्प मैंने लिया था
'इस मौनी अमावस्या पर माघ मेले में मैं स्नान करूंगी और उस स्नान के साथ जो धर्म पर चलने का संकल्प मैंने लिया था, उस संकल्प को मैं विराम दूंगी और वापस अपना पुराना काम करूंगी. जिसमें न ही कोई विरोध था न ही कोई चरित्र हनन जैसा काम था और न ही उधारी थी। मुझसे अब कोई भी युवा कोई भी भाई-बहन यह बोलेंगे कि मुझे धर्म से जुड़ना है, तो मैं उनको यही बोलूंगी कि सबसे बड़ा धर्म है अपनी फैमिली से जुड़कर रहो. अपने परिवार में रहो। अपने घर के मंदिर में पूजा करो। इसके अलावा किसी को मत मानो। मेरा इस धर्म से जाना सिर्फ धर्म से जाना नहीं होगा बल्कि एक विद्रोही मानसिकता लेकर जाना होगा।