हांगझोउ में खेले गए बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल्स के अहम ग्रुप मुकाबले में Satwiksairaj Rankireddy और Chirag Shetty ने शानदार जज्बा दिखाया। मलेशिया के Aaron Chia और Soh Wooi Yik के खिलाफ भारतीय जोड़ी पहला गेम हार गई थी। इसके बावजूद दोनों ने धैर्य नहीं खोया और पूरे आत्मविश्वास के साथ मुकाबले में टिके रहे। यह मैच भारतीय जोड़ी के लिए बेहद अहम था क्योंकि सेमीफाइनल में जगह बनाने के लिए उन्हें कम से कम एक गेम जीतना जरूरी था।
रणनीति बदली और मैच पर पकड़ बनाई
पहला गेम गंवाने के बाद सात्विक और चिराग ने अपनी रणनीति में बदलाव किया। उन्होंने रिटर्न में विविधता लाई और तेज ड्राइव्स के साथ लिफ्ट्स का बेहतरीन इस्तेमाल किया। दूसरे गेम में मुकाबला बेहद कांटे का रहा, लेकिन अहम पलों में भारतीय जोड़ी ने संयम दिखाया। भारी स्मैश और सटीक प्लेसमेंट की बदौलत उन्होंने दूसरा गेम जीतकर मुकाबले को निर्णायक गेम तक खींच लिया। इस जीत के साथ ही भारत का सेमीफाइनल टिकट भी लगभग पक्का हो गया।
निर्णायक गेम में दिखी असली ताकत
तीसरे और आखिरी गेम की शुरुआत भारतीय जोड़ी के लिए आसान नहीं रही, लेकिन जल्दी ही सात्विक और चिराग ने लय पकड़ ली। चार अंकों की लगातार बढ़त ने मैच का रुख बदल दिया। इसके बाद भारतीय जोड़ी ने रैलियों पर पूरा नियंत्रण बना लिया और मलेशियाई खिलाड़ियों से गलतियां निकलवाने में कामयाब रही। आखिरकार निर्णायक गेम जीतते हुए भारतीय जोड़ी ने 70 मिनट चले इस रोमांचक मुकाबले को अपने नाम कर लिया। यह जीत उन्हें ग्रुप में अपराजेय बनाकर सेमीफाइनल तक ले गई।
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भारतीय बैडमिंटन के लिए ऐतिहासिक पल
इस जीत के साथ सात्विक और चिराग BWF World Tour Finals के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय पुरुष जोड़ी बन गई है। भारत की इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में मौजूदगी हमेशा सीमित रही है। इससे पहले पीवी सिंधु ने 2018 में खिताब जीता था और साइना नेहवाल 2011 में फाइनल तक पहुंची थीं। डबल्स में यह उपलब्धि भारतीय बैडमिंटन के लिए एक नया अध्याय है, जो आने वाले समय में और बड़ी उम्मीदें जगाती है।