Satyendar Jain Arrest : दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े कथित टेंडर घोटाले के मामले में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी के बाद सियासत तेज हो गई है। मामले की सुनवाई राउज एवेन्यू कोर्ट में हुई, जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। अदालत ने फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस बीच सत्येंद्र जैन ने गिरफ्तारी को लेकर अपनी सफाई भी पेश की और पूरे मामले को राजनीतिक कार्रवाई बताया।
कोर्ट पहुंचते ही दिया बड़ा बयान
कोर्ट में पेशी के दौरान सत्येंद्र जैन ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने दावा किया कि उनकी गिरफ्तारी का संबंध आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों से है। जैन ने कहा कि वह पंजाब में पार्टी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उनके इस बयान के बाद मामला कानूनी दायरे के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी विषय बन गया है।
एसीबी ने लगाए गंभीर आरोप
एंटी करप्शन ब्यूरो के अनुसार इस मामले में सत्येंद्र जैन और दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़े टेंडर में नियमों का पालन नहीं किया गया। एसीबी का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं और इससे कुछ लोगों को फायदा पहुंचाया गया। इसी आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
पैसों के लेनदेन पर सवाल
जांच एजेंसी ने अदालत में दावा किया कि इस मामले में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन सामने आए हैं। एसीबी के मुताबिक कुछ रकम बैंक खातों के जरिए ट्रांसफर की गई और उसका इस्तेमाल संपत्तियों की खरीद में किया गया। एजेंसी का कहना है कि मामले में वित्तीय लेनदेन की पूरी कड़ी की जांच की जा रही है। इसके अलावा कुछ अन्य लोगों की भूमिका को लेकर भी पड़ताल जारी है।
मंत्री होने के बावजूद दी यह दलील
सुनवाई के दौरान सत्येंद्र जैन ने अदालत में कहा कि उनसे ऐसे तकनीकी सवाल पूछे गए जिनकी जानकारी किसी मंत्री को सामान्य तौर पर नहीं होती। उन्होंने कहा कि विभागीय फैसले इंजीनियरों और विशेषज्ञ अधिकारियों की सलाह के आधार पर लिए जाते हैं। जैन का कहना था कि उनके पास कई मंत्रालयों की जिम्मेदारी थी और टेंडर से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जानकारी संबंधित अधिकारी संभालते थे।
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टेंडर और जेल का भी किया जिक्र
सत्येंद्र जैन ने अदालत को बताया कि वह मई 2022 में मंत्रालय से हट चुके थे और बाद में जेल में भी रहे। उन्होंने दावा किया कि जिस टेंडर को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उसकी प्रक्रिया उनके पद छोड़ने के बाद आगे बढ़ी थी। जैन ने यह भी कहा कि यमुना को साफ करने और सीवेज व्यवस्था सुधारने के लिए सरकार लगातार काम कर रही थी। अब सभी की नजर अदालत के अगले आदेश और जांच की आगे की दिशा पर टिकी हुई है।