F35 CHINA CONCERN: अमेरिका ने सऊदी अरब को 48 अत्याधुनिक F-35 लड़ाकू विमान और एक अतिरिक्त इंजन देने की करीब 24.3 अरब डॉलर की डील को आगे बढ़ा दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, इस सौदे से सऊदी अरब की मौजूदा और भविष्य के खतरों से निपटने की क्षमता मजबूत होगी। हालांकि, इसी डील को लेकर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने चीन तक F-35 की संवेदनशील तकनीक पहुंचने की आशंका जताई है।
चीन की पहुंच को लेकर चिंता
अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों में सऊदी अरब और चीन के बढ़ते रक्षा सहयोग को लेकर सवाल उठाए गए हैं। पेंटागन की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी की रिपोर्ट में चिंता जताई गई है कि F-35 से जुड़ी संवेदनशील तकनीक वाले सैन्य ठिकानों को सुरक्षित रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
रिपोर्ट में सऊदी सैन्य ठिकानों तक चीनी सैन्य अधिकारियों की पहुंच और वहां इस्तेमाल होने वाली चीनी तकनीक का भी उल्लेख किया गया है। अमेरिका को खास तौर पर F-35 के उन्नत रडार, निगरानी प्रणाली और दूसरी संवेदनशील तकनीक की सुरक्षा की चिंता है।
Huawei और ZTE पर भी नजर
अमेरिकी रिपोर्टों में सऊदी अरब के दूरसंचार और रक्षा ढांचे में चीनी तकनीक के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। Huawei और ZTE जैसी चीनी कंपनियों की मौजूदगी को लेकर अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि F-35 से जुड़ी संवेदनशील सुविधाओं तक उनकी पहुंच न हो।
कांग्रेस करेगी सौदे की समीक्षा
अमेरिकी विदेश विभाग ने इस सौदे की औपचारिक सूचना कांग्रेस को दे दी है। सांसदों के पास इसकी समीक्षा के लिए 30 दिन का समय है। कुछ अमेरिकी सांसदों ने भी चीन तक F-35 तकनीक पहुंचने की आशंका को लेकर चिंता जताई है।
इजराइल की बढ़त भी मुद्दा
सऊदी अरब को F-35 मिलने से पश्चिम एशिया में इजराइल की सैन्य बढ़त को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अमेरिका लंबे समय से इजराइल की ‘क्वालिटेटिव मिलिट्री एज’ बनाए रखने की नीति का समर्थन करता रहा है। इससे पहले UAE के साथ F-35 सौदे में भी चीन से जुड़े सुरक्षा सवाल सामने आ चुके हैं।