Savan ka abhandara : सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का सबसे उत्तम समय माना जाता है. इस पूरे मास में भक्तगण शिवजी को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं, जलाभिषेक करते हैं और दान-पुण्य में भाग लेते हैं. इन्हीं पुण्य कार्यों में से एक है — भंडारा करना, यानी निःशुल्क भोजन वितरण. यह न केवल मानव सेवा का प्रतीक है, बल्कि शिवभक्ति का भी श्रेष्ठ माध्यम माना गया है. परंतु एक सवाल अक्सर मन में आता है — भंडारे में ऐसा क्या बनाया जाए जिससे भोलेनाथ विशेष रूप से प्रसन्न हों?
सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि शिवजी को सरलता और सादगी अत्यंत प्रिय है. वे “औघड़” हैं, जिन्हें दिखावा, बनावट और भोग-विलास नहीं चाहिए. अतः भंडारे में भी यदि भोजन सात्विक, शुद्ध और सादगीपूर्ण हो, तो वह शिवजी को अधिक प्रिय होता है.
भंडारे में सबसे ज़रूरी होती है सात्विकता. इसमें प्याज और लहसुन का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि सावन में उपवास करने वाले लोग अधिकतर सात्विक आहार ही ग्रहण करते हैं. इसलिए भंडारे में जो भोजन परोसा जाए वह शरीर को शुद्ध रखे और आत्मा को शांत करे.
आमतौर पर सावन के भंडारे में निम्नलिखित वस्तुएँ प्रमुख रूप से शामिल की जाती हैं:
कुट्टू या सिंहाड़े के आटे की पूड़ियाँ – ये व्रत करने वालों के लिए उपयुक्त होती हैं.
आलू की सब्ज़ी (सिंधा नमक के साथ) – हल्की, स्वादिष्ट और सात्विक.
कद्दू या लौकी की सब्ज़ी – पचने में आसान और शुद्धता से भरपूर.
सीधा चावल या समा के चावल – जो उपवास में भी ग्रहण किए जा सकते हैं.
मिठाई जैसे हलवा या खीर – खासतौर पर दूध और गुड़ से बनी खीर को अत्यंत शुभ माना जाता है.
फल एवं फलाहार सामग्री – जैसे केला, सेव, खजूर आदि.
इसके अलावा एक और चीज़ जो अत्यंत महत्वपूर्ण है — वह है भोजन की भावना और शुद्धता. भोजन चाहे जितना भी साधारण क्यों न हो, यदि वह प्रेम, श्रद्धा और भक्ति के साथ परोसा जाए, तो शिवजी अवश्य प्रसन्न होते हैं. भोजन बनाते समय मन में सेवा भाव होना चाहिए, और परोसते समय मुस्कुराहट और आदरभाव.
निष्कर्षतः, सावन के भंडारे में सबसे ज़रूरी है सात्विक और शुद्ध भोजन का आयोजन, जिसमें कोई दिखावा न हो, सिर्फ सेवा और भक्ति का भाव हो. भोजन में क्या है — ये उतना मायने नहीं रखता, जितना कि उसमें “कैसे” है — यानी श्रद्धा, निर्मलता और समर्पण से भरा हुआ। यदि आप सच्चे मन से भंडारा करते हैं और हर भूखे को प्रेमपूर्वक खिलाते हैं, तो शिवजी निश्चय ही आप पर कृपा करेंगे.