Sawan 2025: सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस माह में शिव भक्त विशेष रूप से व्रत रखते हैं, मंदिरों में जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं और दर्शन करते हैं। लेकिन हर वर्ष एक सवाल महिलाओं के मन में विशेष रूप से उठता है — क्या मासिक धर्म (पीरियड्स) के दौरान शिव मंदिर जाना या पूजा करना सही है? इस संवेदनशील विषय पर हाल ही में संत प्रेमानंद महाराज ने एक सशक्त और स्पष्ट मत प्रस्तुत किया है। उन्होंने समाज की वर्षों पुरानी रूढ़ियों को तोड़ते हुए कहा कि मासिक धर्म कोई अपवित्रता नहीं, बल्कि यह एक प्राकृतिक और ईश्वरदत्त प्रक्रिया है। इसे लेकर महिलाओं को पूजा-पाठ और मंदिर दर्शन से वंचित करना गलत है।
प्रेमानंद महाराज ने कहा
"भगवान शिव अर्धनारीश्वर हैं – वे स्त्री और पुरुष दोनों के प्रतीक हैं। शिव किसी भेदभाव में विश्वास नहीं करते। अगर कोई महिला श्रद्धा और भक्ति से प्रेरित होकर भगवान के दर्शन करना चाहती है, तो उसे रोका नहीं जाना चाहिए।"उन्होंने यह भी जोड़ा कि धर्म का मूल उद्देश्य आत्मिक शुद्धता और प्रेम है, न कि शरीर से जुड़ी परिस्थितियों को आधार बनाकर भक्ति से रोक लगाना। आज समय की मांग है कि हम पुराने विचारों की पुनर्समीक्षा करें और महिलाओं को आध्यात्मिक समानता दें। इस बयान के बाद समाज के विभिन्न वर्गों से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं आई हैं। कई महिलाओं ने इसे एक साहसिक और समयानुकूल पहल बताया है, जो नारी सम्मान की दिशा में एक जरूरी कदम है।
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प्रेमानंद महाराज का यह दृष्टिकोण न केवल सामाजिक बदलाव की दिशा में प्रेरक है, बल्कि यह यह दर्शाता है कि ईश्वर की भक्ति में लिंग या शारीरिक दशा कोई बाधा नहीं हो सकती। सावन में भी, यदि आपकी श्रद्धा सच्ची है, तो शिव जी के द्वार आपके लिए सदैव खुले हैं।