sawan 2025: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पावन समय माना जाता है। इस दौरान शिव भक्त पूरे श्रद्धा और विधि-विधान के साथ शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। लेकिन कई बार अनजाने में ऐसी गलतियां हो जाती हैं, जो पूजा का प्रभाव घटा सकती हैं या अशुभ फल दे सकती हैं। इसलिए सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक होता है।
किस दिशा में मुंह करके करें जलाभिषेक?
शास्त्रों के अनुसार, शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय भक्त को हमेशा उत्तर दिशा की ओर मुख करके अभिषेक करना चाहिए। ऐसा करने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है और पूजा का संपूर्ण फल मिलता है। यह दिशा धन, ज्ञान और शांति की वृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।
ये 8 गलतियां बिल्कुल न करें
तांबे के लोटे से जल न चढ़ाएं – शिवलिंग पर तांबे के पात्र से जल चढ़ाना वर्जित माना गया है। इसके स्थान पर कांसे, पीतल या स्टील के बर्तन का प्रयोग करें।
कटे-फटे बेलपत्र न चढ़ाएं – केवल ताजे, त्रिपर्ण और साफ बेलपत्र ही शिवजी को अर्पित करें। कटे या कीड़े लगे बेलपत्र नहीं चढ़ाएं।
शिवलिंग पर तुलसी दल न रखें – तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय है, जबकि शिव को इससे वर्जना है।
शिवलिंग पर केसर या सिंदूर न लगाएं – ये श्रृंगार सामग्री शिव पूजा में वर्जित है।
दूध को फेंकें नहीं – अभिषेक के लिए उपयोग किया गया दूध बाद में प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें या किसी पौधे में डालें, फेंकना अपवित्रता मानी जाती है।
जूते पहनकर जलाभिषेक न करें – शिवालय में प्रवेश से पहले जूते-चप्पल बाहर उतार दें।
रात के समय जलाभिषेक से बचें – दिन के समय विशेषकर ब्रह्म मुहूर्त में जल अर्पण करना श्रेष्ठ होता है।
शिवलिंग के ऊपर से परिक्रमा न करें – जल चढ़ाते समय शिवलिंग के एक ओर से चलें और पूर्ण परिक्रमा न करें।
इन नियमों और दिशा का ध्यान रखकर यदि श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की पूजा की जाए तो सावन में उनकी कृपा अवश्य प्राप्त होती है और जीवन में सुख-शांति, समृद्धि प्राप्त होती है ..