Sawan 2025 : सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना का विशेष समय माना जाता है। इस बार सावन का दूसरा सोमवार और एकादशी एक ही दिन पड़ रहे हैं, जो अत्यंत शुभ संयोग बना रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह दिन श्रद्धालुओं के लिए कई पुण्य फल देने वाला है क्योंकि सोमवार और एकादशी दोनों का ही धार्मिक महत्व अत्यधिक है।
शुभ संयोगों का महत्व
इस वर्ष सावन के दूसरे सोमवार को पवित्र देवशयनी एकादशी भी मनाई जाएगी। इस दिन व्रत, पूजन और शिवलिंग पर जलाभिषेक का विशेष महत्व है। सोमवार भगवान शिव का दिन होता है और एकादशी श्रीहरि विष्णु को समर्पित होती है। दोनों देवों की उपासना एक साथ होने से श्रद्धालु को दुगुना पुण्य प्राप्त होता है।इस दिन रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे अत्यंत शुभ मुहूर्त भी बन रहे हैं। इन योगों में किया गया पूजा-पाठ, व्रत, दान और जलाभिषेक विशेष फलदायी होता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, ये संयोग जीवन की परेशानियों को दूर करने, स्वास्थ्य लाभ, और आर्थिक समृद्धि लाने वाले होते हैं।
पूजन विधि और लाभ
सावन सोमवार और एकादशी के इस अद्भुत मेल पर प्रातः स्नान करके व्रत का संकल्प लें। शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भस्म और भांग अर्पित करें। "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें। साथ ही तुलसी के पत्तों के साथ श्रीहरि विष्णु की भी पूजा करें। इस दिन व्रत रखने से पापों का नाश होता है, मोक्ष की प्राप्ति होती है और भगवान शिव के साथ-साथ भगवान विष्णु की भी कृपा प्राप्त होती है।
दुर्लभ संयोग
सावन के दूसरे सोमवार और एकादशी का यह दुर्लभ योग आध्यात्मिक उन्नति और जीवन में सुख-शांति लाने का अनमोल अवसर है। ऐसे शुभ संयोग में किया गया हर कर्म विशेष फल देता है। इसलिए इस दिन शिव और विष्णु दोनों की आराधना करके अपने जीवन को पवित्र और मंगलमय बनाएं...