सावन 2025: श्रावण मास, जिसे आम बोलचाल में सावन कहा जाता है, हिन्दू धर्म में भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। विशेष रूप से सावन के सोमवार को व्रत रखने का महत्व अत्यधिक है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। हालांकि, उज्जैन के प्रसिद्ध आचार्य पंडित राघव शर्मा के अनुसार, कुछ विशेष परिस्थितियों में सावन सोमवार का व्रत करना उचित नहीं होता। उन्होंने इसके पीछे धार्मिक और आयुर्वेदिक दोनों ही दृष्टिकोणों से कारण बताए हैं।
किन लोगों को नहीं रखना चाहिए सावन सोमवार का व्रत?
आचार्य राघव शर्मा बताते हैं कि व्रत एक प्रकार की तपस्या है, जिसमें शरीर और मन दोनों की परीक्षा होती है। ऐसे में हर किसी के लिए व्रत करना उपयुक्त नहीं होता। आइए जानते हैं कौन-कौन लोग सावन सोमवार का व्रत करने से बचें: पंडित जी ने बताया कि गर्भवस्था में शरीर को संतुलित आहार और नियमित ऊर्जा की आवश्यकता होती है। व्रत के दौरान भोजन की मात्रा और गुणवत्ता दोनों ही प्रभावित होती हैं, जिससे गर्भस्थ शिशु पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से दवाइयाँ ले रहा है, विशेषकर मधुमेह, हृदय रोग या रक्तचाप जैसी बीमारियों के लिए, तो उसे उपवास से परहेज करना चाहिए। खाली पेट दवाइयों का सेवन स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है।
ये भी करें परहेज
जिनकी इम्यूनिटी पहले से ही कमजोर है, उन्हें व्रत से शरीर में और अधिक कमजोरी महसूस हो सकती है। इससे संक्रमण या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की आशंका बढ़ जाती है। शारीरिक विकास की अवस्था में बच्चों को पोषणयुक्त भोजन की आवश्यकता होती है, वहीं वृद्धों को भी संतुलित आहार चाहिए। ऐसे में दोनों वर्गों के लिए व्रत करना नुकसानदेह हो सकता है। पंडित जी कहते हैं ऐसे लोग अगर आप किसी कारणवश व्रत नहीं रख पा रहे हैं, तो भी भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं। जल, बेलपत्र, दूध और धतूरा अर्पण करना, शिव चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी होता है।