Shivling Jalabhishek Rules: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस पवित्र महीने में बड़ी संख्या में भक्त मंदिरों में जाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और भोलेनाथ से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा से ही प्रसन्न हो जाते हैं और केवल जल अर्पित करने मात्र से भी उनकी कृपा प्राप्त हो सकती है। हालांकि, शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय कुछ नियमों का पालन करना जरूरी माना गया है। मान्यता है कि पूजा के दौरान छोटी-सी गलती भी पूजा के फल को प्रभावित कर सकती है। आइए जानते हैं शिवलिंग पर जलाभिषेक करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
सही दिशा में खड़े होकर करें जलाभिषेक
शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जल अर्पित करते समय भक्त का मुख उत्तर दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है। वहीं पूर्व और दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल चढ़ाने से बचने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
जल की धारा को टूटने न दें
शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय कोशिश करनी चाहिए कि जल एक समान धारा में चढ़ाया जाए। बीच-बीच में रुकती हुई धारा से जल चढ़ाना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। इसलिए धीरे-धीरे और श्रद्धा के साथ लगातार जल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
शंख से शिवलिंग पर जल न चढ़ाएं
कई धार्मिक मान्यताओं में भगवान शिव के अभिषेक के लिए शंख का प्रयोग वर्जित बताया गया है। इसलिए शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय शंख की जगह लोटे या अन्य पात्र का इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है। श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करने से भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है।
यह भी पढ़ें: Guru Budh Yuti 2026: गुरु-बुध की युति से बनेगा पांडित्य योग, इन 4 राशियों को मिल सकते हैं धन और तरक्की के अवसर
परिक्रमा करते समय रखें ध्यान
शिवलिंग पर जल चढ़ाने के बाद अगर आप परिक्रमा करते हैं तो पूरी परिक्रमा करने की बजाय चंद्राकार परिक्रमा करने की मान्यता है। साथ ही शिवलिंग से निकलने वाली जलधारा को कभी भी पार नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार ऐसा करने से पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता।
जलाभिषेक के समय करें मंत्रों का जाप
शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय भगवान शिव के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। अगर आप ज्यादा मंत्रों का जाप नहीं कर पाते हैं तो केवल 'ॐ नमः शिवाय' या 'ॐ' का उच्चारण भी कर सकते हैं। इससे मन को शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। सावन के महीने में जलाभिषेक के साथ भगवान शिव को बेलपत्र, भांग, धतूरा और पुष्प अर्पित करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमों के साथ की गई पूजा से भोलेनाथ जल्दी प्रसन्न होते हैं।