Sawan Amavasya 2026: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए खास माना जाता है। इस दौरान पड़ने वाली अमावस्या का भी अपना धार्मिक महत्व है। साल 2026 की सावन अमावस्या पर पुष्य नक्षत्र का संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं में पुष्य नक्षत्र को शुभ और स्थिरता से जुड़ा माना जाता है। इसलिए इस दिन स्नान, दान, पितरों का तर्पण और पूजा-पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान करने और अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को दान देने से पुण्य मिलता है। इस बार सावन अमावस्या के साथ सूर्य ग्रहण भी पड़ रहा है। ऐसे में पूजा, स्नान और दान से जुड़े कार्यों के लिए सही समय की जानकारी होना जरूरी हो जाता है।
सावन अमावस्या पर स्नान का शुभ समय
सावन अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान और पूजा करने की परंपरा है। दिए गए समय के अनुसार इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:23 बजे से 5:06 बजे तक रहेगा। इसके बाद लाभ और अमृत चौघड़िया सुबह 5:49 बजे से 9:07 बजे तक रहेगा। वहीं, सूर्य ग्रहण का समय भारतीय समय के अनुसार रात 9:04 बजे से देर रात 12:04 बजे तक बताया गया है।
स्नान के बाद क्या करना शुभ माना जाता है?
अमावस्या के दिन स्नान के बाद पूजा-पाठ और दान करने की परंपरा रही है। मान्यता है कि पवित्र जल में स्नान करने के बाद पितरों के लिए तर्पण करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, अनाज, वस्त्र और तिल जैसी वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है। हरियाली अमावस्या के अवसर पर सुहागिन महिलाओं को श्रृंगार से जुड़ी वस्तुएं देने की भी परंपरा कुछ स्थानों पर है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना की जाती है।
पीपल के नीचे दीपक जलाने की परंपरा
अमावस्या पर पीपल के पेड़ की पूजा करने की भी परंपरा है। श्रद्धालु पीपल के नीचे दीपक जलाकर भगवान से सुख-शांति की प्रार्थना कर सकते हैं। हालांकि, पूजा के दौरान पेड़ की शाखाओं या जड़ों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।
हरियाली अमावस्या पर पौधारोपण का महत्व
हरियाली अमावस्या प्रकृति और पर्यावरण से भी जुड़ा पर्व माना जाता है। इस अवसर पर पौधे लगाने की परंपरा कई क्षेत्रों में देखने को मिलती है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ पौधारोपण पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक अच्छा कदम है। इस दिन पीपल, बरगद, नीम, आंवला, बेल और शमी जैसे पौधे लगाने को धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है। घर में तुलसी का पौधा लगाना भी सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखता है।
हरियाली अमावस्या पर लगाएं ये पौधे
पीपल: धार्मिक परंपरा में पीपल को पूजनीय वृक्ष माना गया है। इसकी पूजा से मानसिक शांति और सकारात्मकता की कामना की जाती है।
बरगद: बरगद का संबंध दीर्घायु और स्थिरता से जोड़ा जाता है। धार्मिक अनुष्ठानों में भी इसका विशेष महत्व बताया गया है।
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नीम: नीम को शुद्धता और स्वास्थ्य से जोड़कर देखा जाता है। पर्यावरण की दृष्टि से भी यह उपयोगी पेड़ माना जाता है।
आंवला: धार्मिक मान्यताओं में आंवले का संबंध भगवान विष्णु से बताया गया है। इसे घर या आसपास लगाना शुभ माना जाता है।
बेल: भगवान शिव को बेलपत्र प्रिय माना जाता है। सावन के दौरान बेल के पौधे का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
तुलसी: तुलसी को भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी से संबंधित माना जाता है। हिंदू परिवारों में इसकी पूजा की विशेष परंपरा है।
शमी: धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में शमी का संबंध भगवान शिव और शनिदेव से जोड़ा जाता है। इसलिए शमी का पौधा लगाना भी शुभ माना जाता है।