Sawan Mangla Gauri Vrat 2026: सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित माना जाता है। इस दौरान शिव-पार्वती की आराधना करने से भक्तों को विशेष फल मिलने की धार्मिक मान्यता है। सावन में पड़ने वाले मंगलवार भी महिलाओं के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, परिवार की खुशहाली और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की कामना करते हुए मंगला गौरी का व्रत रखती हैं। आज सावन का अंतिम मंगला गौरी व्रत है। ऐसे में भक्त विधि-विधान से माता गौरी और भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं। मान्यता है कि इस व्रत में श्रद्धा के साथ पूजा करने से मां गौरी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
मंगला गौरी पूजा का शुभ समय
25 अगस्त 2026 को पूजा-पाठ के लिए अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:03 बजे से 12:54 बजे तक रहेगा। इसके अलावा अमृत काल दोपहर 3:48 बजे से शाम 5:33 बजे तक है। इन दोनों शुभ समय में मां गौरी और भगवान शिव की पूजा करना मंगलकारी माना जाता है।
मंगला गौरी व्रत पर ऐसे करें पूजा
व्रत रखने वाली महिलाओं को सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके वहां गंगाजल का छिड़काव करें। मां गौरी का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजा के लिए एक चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं और उस पर माता पार्वती तथा भगवान शिव की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद आटे से तैयार चार मुख वाला दीपक जलाकर पूजा शुरू करें। माता गौरी को लाल वस्त्र अर्पित करें। इसके साथ फल, फूल, पान, सुपारी, इलायची, लौंग, लड्डू और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं। पूजा के दौरान मां गौरी के मंत्रों का जाप करें और श्रद्धा के साथ भगवान शिव-पार्वती का ध्यान करें। मंगला गौरी व्रत की कथा का पाठ करना भी पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। चूंकि आज सावन का अंतिम मंगला गौरी व्रत है, इसलिए माता को 16 श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा पूजा में 16 फूल, 16 फल और 16 मोदक या लड्डू चढ़ाए जा सकते हैं। अंत में भगवान शिव और माता गौरी की आरती करें और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें।
पूजा के बाद करें दान
मंगला गौरी व्रत में पूजा-पाठ के साथ दान का भी महत्व बताया गया है। पूजा संपन्न होने के बाद अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, धन, कपड़े या रोजमर्रा की उपयोगी वस्तुएं दान की जा सकती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सामर्थ्य के अनुसार किया गया दान पुण्य फल प्रदान करता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।