Sawan Pradosh Vrat 2026: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस दौरान पड़ने वाले सोमवार, मंगला गौरी व्रत और प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। सावन का पहला प्रदोष व्रत शिव भक्तों के लिए अत्यंत शुभ अवसर माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। आइए जानते हैं सावन के पहले प्रदोष व्रत की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्व।
सावन का पहला प्रदोष व्रत कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार सावन मास का पहला प्रदोष व्रत 6 अगस्त 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। यह व्रत श्रावण शुक्ल त्रयोदशी तिथि पर पड़ रहा है। गुरुवार के दिन आने के कारण इसे गुरु प्रदोष व्रत भी कहा जाएगा। इस दिन भगवान शिव की प्रदोष काल में विधि-विधान से पूजा करने का विशेष फल प्राप्त होता है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।
प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
प्रदोष व्रत में सबसे अधिक महत्व सूर्यास्त के बाद के प्रदोष काल का होता है। इस दौरान भगवान शिव, माता पार्वती और नंदी महाराज की पूजा की जाती है। शिवलिंग पर जल, दूध, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, भस्म और सफेद पुष्प अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा के समय 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप और शिव चालीसा या प्रदोष व्रत कथा का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है।
प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। इस व्रत के प्रभाव से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है, आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है। जिन लोगों के विवाह में बाधाएं आ रही हों या करियर और व्यापार में रुकावटें हों, उनके लिए भी प्रदोष व्रत लाभकारी माना जाता है। सावन में आने वाला प्रदोष व्रत विशेष रूप से पुण्यदायी माना गया है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
प्रदोष व्रत के दिन सात्विक भोजन करें और क्रोध, विवाद तथा नकारात्मक विचारों से दूर रहें। पूजा से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और श्रद्धापूर्वक भगवान शिव का अभिषेक करें। यदि संभव हो तो शाम के समय शिव मंदिर जाकर दीपक जलाएं और जरूरतमंद लोगों को अन्न या वस्त्र का दान करें। मान्यता है कि सच्चे मन से किए गए प्रदोष व्रत और शिव आराधना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख, समृद्धि और भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है।