Sawan Somwar Jalabhishek Muhurat: आज सावन का तीसरा सोमवार है। भगवान शिव की आराधना के लिए सावन सोमवार का खास महत्व माना जाता है। इस बार 17 अगस्त का दिन इसलिए भी खास है, क्योंकि सोमवार के साथ कई धार्मिक पर्व और ज्योतिषीय संयोग एक साथ बन रहे हैं। भक्त इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं और शिवलिंग पर जलाभिषेक कर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना कर सकते हैं। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, 17 अगस्त को नाग पंचमी, सिंह संक्रांति, स्कंद षष्ठी और मलयालम नववर्ष भी मनाया जा रहा है। इसके अलावा दिन में कुछ शुभ योग भी बन रहे हैं। यही वजह है कि इस बार का तीसरा सावन सोमवार धार्मिक और ज्योतिषीय नजरिए से काफी खास माना जा रहा है। जानें जलाभिषेक के शुभ मुहूर्त और शुभ योग के बारे में....
तीसरे सावन सोमवार पर बनेंगे ये खास संयोग
17 अगस्त को सावन सोमवार के अलावा शुभ योग, रवि योग, हंसराज योग, बुधादित्य योग और त्रिग्रही योग का भी उल्लेख किया जा रहा है। साथ ही नाग पंचमी, सिंह संक्रांति, स्कंद षष्ठी और मलयालम नववर्ष होने के कारण दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
दिन की शुरुआत शुभ योग से
17 अगस्त को दिन की शुरुआत शुभ योग के साथ होगी। बताया जाता है कि यह योग अगले दिन यानी 18 अगस्त की रात करीब 3:29 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं में शुभ योग को पूजा, धार्मिक अनुष्ठान और अन्य मंगल कार्यों के लिए अच्छा माना जाता है।
रवि योग
तीसरे सोमवार को सुबह 5:51 बजे से 8:04 बजे तक रवि योग रहेगा। ज्योतिष में रवि योग को विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि इस योग में किए गए धार्मिक कार्यों से सकारात्मक फल की प्राप्ति हो सकती है।
सूर्य करेंगे सिंह राशि में प्रवेश
17 अगस्त की सुबह करीब 8:03 बजे सूर्य कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ सिंह संक्रांति शुरू होगी। सिंह संक्रांति का पुण्यकाल सुबह 5:51 बजे से 8:04 बजे तक बताया गया है। इस दौरान स्नान, दान और पूजा-पाठ करने की धार्मिक परंपरा है।
स्कंद षष्ठी
17 अगस्त को शाम करीब 5 बजे के बाद षष्ठी तिथि आरंभ होगी। इसी वजह से इस दिन स्कंद षष्ठी का भी संयोग बन रहा है। स्कंद षष्ठी पर भगवान कार्तिकेय की पूजा की जाती है, जो भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं। सावन सोमवार के साथ इस पर्व का पड़ना शिव परिवार की आराधना के लिहाज से खास माना जा रहा है।
मलयालम नववर्ष भी इसी दिन
17 अगस्त को मलयालम नववर्ष की शुरुआत भी होगी। इस वजह से यह दिन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण रहेगा।
गुरु की स्थिति से हंसराज योग
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस समय देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि में उच्च अवस्था में हैं। गुरु की इस स्थिति को हंसराज योग से जोड़ा जाता है। इसे ज्ञान, उन्नति, सम्मान और सफलता से संबंधित शुभ योग माना जाता है।
बुध और सूर्य की युति से बुधादित्य योग
कर्क राशि में सूर्य और बुध की मौजूदगी के कारण बुधादित्य योग बन रहा है। हालांकि यह योग लंबे समय तक नहीं रहेगा। सूर्य के 17 अगस्त की सुबह 8:03 बजे सिंह राशि में प्रवेश करते ही कर्क राशि में बनने वाला यह संयोग समाप्त हो जाएगा।
त्रिग्रही योग
17 अगस्त की सुबह तक कर्क राशि में सूर्य, बुध और गुरु की स्थिति के कारण त्रिग्रही योग भी बन रहा है। सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ ही यह योग भी खत्म हो जाएगा। इसलिए यह संयोग केवल सीमित अवधि के लिए ही रहेगा।
नाग पंचमी का भी रहेगा संयोग
सावन के तीसरे सोमवार के दिन ही नाग पंचमी भी पड़ रही है। भगवान शिव और नाग देवता का संबंध माना जाता है, इसलिए इस दिन शिव पूजा के साथ नाग देवता की आराधना का भी विशेष महत्व बताया जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार नाग देवता की पूजा कर सकते हैं।
जलाभिषेक के लिए शुभ समय ब्रह्म
मुहूर्त: सुबह 4:24 बजे से 5:08 बजे तक
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: सुबह 5:51 बजे से 7:30 बजे तक
शुभ-उत्तम मुहूर्त: सुबह 9:08 बजे से 10:47 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:51 बजे तक
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।