नोएडा की 72 साल की वरिष्ठ महिला वकील को 15 दिनों तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखने और उनके कई फिक्स्ड डिपॉज़िट जब्त कर ₹3.29 करोड़ की ठगी करने की घटना ने साइबर अपराधियों की नई रणनीति उजागर कर दी है. ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर बैंक खाते में अवैध गतिविधियों का झूठा आरोप लगाकर उन्हें डराया, फिर व्हाट्सऐप कॉल और झूठी जांच दिखाकर फंसा दिया. आईटी अधिनियम सहित कई धाराओं में FIR दर्ज हो चुकी है और सायबर पुलिस अब ठगी गई रकम को फ्रीज़ कराने तथा आरोपियों की खोज में जुट गई है .
नोएडा के सेक्टर‑47 में रहने वाली 72 साल वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट वकील हेमन्तिका वाही को 15 दिन तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा गया और डरा कर के उनके बैंक अकाउंटों से ₹3.29 करोड़*ठग लिए.
कैसे क्या हुआ?
10 जून को वकील को उनके लैंडलाइन पर फोन आया, जिसमें बताया गया कि उनके आधार नंबर का उपयोग कर चार बैंक खातों में हथियार तस्करी, ब्लैकमेलिंग और जुआ जैसी गतिविधियों में लिप्त लेन‑देन हो रहा है. पुलिस कार्रवाई का डर दिखाया गया और उन्हें एक नंबर दे दिया गया, जिसे कॉल करने पर उन्होंने फर्जी डिजिटल गिरफ़्तारी यानी ऑनलाइन लॉक-अप की प्रक्रिया में डाला.
कैसे लिया गया पैसा?
1. ठगों ने WhatsApp पर वॉरंट भेजा, और कहा कि जांच पूरी होने तक उन्हें वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा जाएगा.
2. डर के चलते उन्होंने अपनी FD तोड़ी और पैसे दो बैंक खातों में रखवाए.
3. इसके बाद 16–24 जून के बीच पाँच आरटीजीएस ट्रांसफर के जरिये ₹3.29 करोड़ ट्रांसफर करा दिए गए.पहला ₹63 लाख राजस्थान, अगला ₹73 लाख दिल्ली, फिर ₹93 लाख हरियाणा, ₹87 लाख फिर दिल्ली और अंत में ₹15.7 लाख कोलकाता में गए.
कहां तक पहुंची जांच?
पीड़िता ने प्रदीप सावंत, शिवा प्रसाद सहित वीडियो कॉल पर मिले धोखेबाजों के नाम शिकायत में दिए हैं. नोएडा साइबर थाना ने मामला दर्ज कर सभी बैंक खातों को फ्रीज करने की तैयारी की है, साथ ही गिरफ्तारी की दिशा में जाँच तेज कर दी है.
डीसीपी साइबर की चेतावनी
डीसीपी (साइबर) प्रीति यादव ने बताया कि नवंबर 2024–मई 2025 के बीच नोएडा में साइबर अपराधों में करीब ₹53 करोड़ की धन-वसूली हुई है. “डिजिटल अरेस्ट” जैसी धोखाधड़ियां, डकैती, फर्जी निवेश, फिशिंग और KYC धोखाधड़ी आम हुई हैं. अभी तक अलग अलग मामलों में 553 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया और हर माह ₹3 करोड़ की ठगी की रकम बरामद की गई है .