Scam Centers Across Multiple Countries: दुनिया भर में बढ़ रहे साइबर अपराध अब केवल ऑनलाइन ठगों तक सीमित नहीं रह गए हैं। एशिया-पैसिफिक ग्रुप ऑन मनी लॉन्ड्रिंग (APG) की मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशिया में ऐसे संगठित साइबर स्कैम हब सक्रिय हैं, जहां नौकरी का झांसा देकर लोगों की तस्करी की जाती है और फिर उन्हें जबरन ऑनलाइन ठगी करने के लिए मजबूर किया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन नेटवर्कों का कारोबार हर साल अरबों डॉलर तक पहुंच चुका है और इनके निशाने पर 100 से अधिक देशों के नागरिक हैं।
दक्षिण-पूर्व एशिया में फैला साइबर स्कैम नेटवर्क
रिपोर्ट के अनुसार, ये स्कैम सेंटर मुख्य रूप से म्यांमार, कंबोडिया, लाओस, थाईलैंड और फिलीपींस के सीमावर्ती इलाकों तथा स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) में संचालित किए जा रहे हैं। कमजोर कानून व्यवस्था और सीमित निगरानी का फायदा उठाकर अपराधी सुरक्षित परिसरों में अपना नेटवर्क चलाते हैं। जब किसी स्थान पर कार्रवाई तेज होती है, तो गिरोह अपना ठिकाना बदल लेते हैं या नए नाम से गतिविधियां शुरू कर देते हैं।
नौकरी का झांसा देकर कराई जाती है ऑनलाइन ठगी
रिपोर्ट में बताया गया है कि अधिकांश लोगों को विदेश में आकर्षक नौकरी, बेहतर वेतन और उज्ज्वल भविष्य का सपना दिखाकर बुलाया जाता है। वहां पहुंचने के बाद उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते हैं और उन्हें दिन-रात साइबर ठगी करने के लिए मजबूर किया जाता है। विरोध करने वालों के साथ मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और बंधक जैसी परिस्थितियां पैदा की जाती हैं। कई मामलों में परिवार से फिरौती मिलने के बाद ही पीड़ितों को छोड़ा जाता है। अपराधी ऐसे युवाओं को प्राथमिकता से निशाना बनाते हैं जिन्हें कंप्यूटर, सोशल मीडिया और क्रिप्टोकरेंसी की जानकारी हो, हालांकि अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग से कम प्रशिक्षित लोगों को भी इस नेटवर्क में शामिल किया जा रहा है।
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दुनिया के कई देशों में सामने आए बड़े मामले
रिपोर्ट में ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश और फिलीपींस के कई मामलों का उल्लेख किया गया है। ऑस्ट्रेलिया के ऑपरेशन फायरस्टॉर्म के तहत बैंकॉक में एक अंतरराष्ट्रीय स्कैम सेंटर का खुलासा हुआ, जहां से लाखों ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की ठगी का मामला सामने आया। बांग्लादेश में लोगों को सोशल मीडिया के जरिए 'विज्ञापन देखकर कमाई' का लालच देकर लाखों टका की धोखाधड़ी की गई। वहीं फिलीपींस में छापेमारी के दौरान सैकड़ों लोगों को ऐसे परिसरों से मुक्त कराया गया, जहां उन्हें जबरन साइबर अपराधों में लगाया गया था। जांच में ऑनलाइन सट्टेबाजी, रोमांस स्कैम और फर्जी निवेश योजनाओं के जरिए धन जुटाने का खुलासा भी हुआ।
मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के लिए वैश्विक सहयोग पर जोर
रिपोर्ट के अनुसार, अपराधी गिरोह ठगी से हासिल रकम को वैध दिखाने के लिए शेल कंपनियों, फर्जी कारोबारी संस्थाओं, मनी म्यूल खातों, क्रिप्टोकरेंसी, पीयर-टू-पीयर ट्रांसफर और हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा धन को रियल एस्टेट, लग्जरी वाहनों और अन्य व्यवसायों में निवेश कर उसकी असली पहचान छिपाई जाती है। एपीजी ने चेतावनी दी है कि यदि इन नेटवर्कों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो साइबर स्कैम हब और अधिक संगठित तथा खतरनाक रूप ले सकते हैं। रिपोर्ट में देशों के बीच सूचना साझा करने, संयुक्त जांच, मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानूनों को मजबूत बनाने, क्रिप्टो लेनदेन की निगरानी बढ़ाने और मानव तस्करी के पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है।