Devastation from the Nepal Floods: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद तबाही और दर्द की कई तस्वीरें सामने आ रही हैं। बाढ़ और भूस्खलन से बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। कई परिवार ऐसे हैं, जिन्होंने अपने कई सदस्यों को इस आपदा में खो दिया है। हादसे के करीब एक सप्ताह बाद लापता लोगों के परिजनों की उम्मीदें भी धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही हैं। काठमांडू के अस्पतालों और शवगृहों के बाहर लोग अपनों की तस्वीरें लेकर उन्हें पहचानने की कोशिश कर रहे हैं। परिवारों की कोशिश है कि अगर जीवित मिलने की उम्मीद न भी हो, तो कम से कम अपने परिजनों के शव मिल जाएं, ताकि अंतिम संस्कार किया जा सके।
अस्पतालों में अपनों को तलाश रहे परिवार
काठमांडू के अस्पतालों के बाहर गुमशुदा लोगों की तस्वीरें लगाई गई हैं। समय बीतने के साथ इन तस्वीरों को तलाशने वालों की संख्या भी कम होती जा रही है। शवगृह के बाहर परिजन एक-एक तस्वीर को ध्यान से देखकर अपनों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि उन्हें अब किसी चमत्कार की उम्मीद नहीं है, लेकिन वे अपने परिजनों के पार्थिव शरीर को ढूंढना चाहते हैं, ताकि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
बॉडी बैग में पहुंच रहे शव
त्रिशूली स्थित सेना के प्रशिक्षण केंद्र में ऊंचाई वाले इलाकों से बरामद किए गए शव लाए जा रहे हैं। राहत और बचाव दल मलबे के बीच से शवों को निकालकर हेलीकॉप्टर की मदद से यहां पहुंचा रहे हैं। इसके बाद शवों को एंबुलेंस के जरिए आगे भेजा जा रहा है। आपदा के कारण कई इलाकों में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं और राहत दल लगातार बचाव अभियान में जुटे हुए हैं।
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करोड़ों का कारोबार पल भर में तबाह
त्रिशूली इलाके में बाढ़ से प्रभावित लोगों में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रसड़ा निवासी अशोक कुमार चौरसिया भी शामिल हैं। करीब 20 साल पहले बेहतर भविष्य की तलाश में नेपाल पहुंचे अशोक ने वहां कपड़ों का बड़ा कारोबार खड़ा किया था। त्रिशूली और आसपास के इलाकों में उनकी कई दुकानें थीं और उनका कारोबार करोड़ों रुपये का बताया जाता है। लेकिन 26 अगस्त की आपदा ने उनका घर और कारोबार दोनों तबाह कर दिया। परिवार के दो सदस्य भी मलबे और बाढ़ की चपेट में आ गए।
52 तोला सोना भी बाढ़ में बहा
अशोक कुमार चौरसिया के मुताबिक बाढ़ से उन्हें चार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि बेटे की शादी के लिए तैयार कराया गया करीब 52 तोला सोना भी बाढ़ में बह गया। उन्होंने अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि कुछ दिन पहले तक उनके पास सब कुछ था, लेकिन आपदा ने उन्हें पूरी तरह बदल दिया। उनके भाई ने बताया कि उनकी पत्नी ऊषा देवी और 20 वर्षीय बेटा राहुल भी बाढ़ में बह गए। घटना के समय वह घर पर मौजूद नहीं थे और अब उन्हें इस बात का गहरा दुख है कि अगर वह उस समय घर से बाहर नहीं गए होते तो शायद अपने परिवार को बचाने की कोशिश कर पाते।
अपनों की तलाश में खत्म होती उम्मीद
नेपाल की इस आपदा ने बड़ी संख्या में परिवारों को गहरे सदमे में पहुंचाया है। कई लोग अब भी अस्पतालों, शवगृहों और राहत शिविरों के चक्कर लगा रहे हैं। लापता परिजनों की तस्वीरें हाथ में लिए लोग हर संभावित जानकारी तलाश रहे हैं। राहत और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चला रहे हैं, जबकि प्रशासन की ओर से मृतकों और लापता लोगों की पहचान की प्रक्रिया भी जारी है। समय बीतने के साथ परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है और हर किसी को अपने अपनों के बारे में किसी खबर का इंतजार है।