बहराइच में आज दर्ज हुई एक अनोखी और चौंकाने वाली घटना ने सभी को हैरान कर दिया. जिस व्यक्ति को सांप ने काटा, उसने उसे पकड़कर अस्पताल में डॉक्टरों को दिखा दिया. हरदी थाना क्षेत्र के पूरे बस्ती गड़रिया के रामदीन जब झाड़ियों में सफाई कर रहे थे, तभी रसेल वाइपर ने उन्हें डसा. तेज दर्द महसूस होने पर रामदीन ने साहसपूर्वक सांप को डिब्बे में बंद कर सीधे मेडिकल कॉलेज ले गया. वहां डॉक्टरों ने तुरंत एंटी-वेन्म इंजेक्शन देकर उनकी जान बचाई और अनुभवी विशेषज्ञों ने साँप की पहचान अत्यधिक जहरीले रसेल वाइपर के रूप में की. जिसके काटने पर गुर्दे खराब होने का खतरा रहता है.
कैसे हुई घटना?
पूरे बस्ती गडरिया गांव में 30 साल के रामदीन घर के बाहर बनी नाली की सफ़ाई कर रहे थे और आसपास की घास भी साफ कर रहे थे. उसी दौरान झाड़ियों में छुपा रसेल वाइपर ने अचानक उनके हाथ पर हमला बोल गया. तेज़ दर्द और जलन महसूस होते ही रामदीन ने साहस और समझदारी दिखाई. उन्होंने साँप को पकड़कर एक डिब्बे में बंद किया और सीधे मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंच गए. ताकि डॉक्टर साँप की पहचान कर सही इलाज करवा सकें. अस्पताल में तैनात डॉ. रामेंद्र त्रिपाठी ने इलाज शुरू करते हुए तुरंत एंटी-वेनम इंजेक्शन लगाया, जिससे उनकी स्थिति नियंत्रण में आ गई. हैरान करने वाली पहल पर सभी लोग चकित रह गए और रामदीन की सूझ-बूझ की जमकर तारीफ़ हो रही है.
ड्यूटी डॉक्टर ने घटना के बारे में दी जानकारी
ड्यूटी पर तैनात डॉ. रामेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि रामदीन ने साँप को लेकर अस्पताल आने की “साहसिक और सूझ-बूझ भरी” पहल की. उन्होंने कहा,"उसने साँप को साथ लाकर डॉक्टरों को सही जानकारी दी और यही समय पर सही निर्णय था जिससे मरीज की जान बची".
डॉ. त्रिपाठी के अनुसार, रामदीन के जल्दी अस्पताल पहुँचने और साँप की पहचान कराने के कारण उन्हें सही एंटी-वेनम इंजेक्शन तुरंत मिल सका। इस जागरूकता और तुरंत इलाज की प्रक्रिया ने रामदीन को गंभीर स्थिति से बाहर रखा और समय रहते बचा लिया.
नेचर इनवायरमेंट एंड वाइल्ड लाइफ सोसाइटी के प्रोजेक्ट मैनेजर अभिषेक कहते हैं कि रसेल वाइपर बेहद जहरीला होता है और उसके काटने के बाद अगर चार घंटे के अंदर उपयुक्त इलाज उपलब्ध न हो तो मरीज के गुर्दों को गंभीर नुकसान हो सकता है. इसीलिए बरसात के मौसम में घर के आसपास गंदगी और झाड़ियों को साफ रखना बेहद जरूरी है. इसी तरह, साँप के काटने के तुरंत बाद लोक उपचार (ओझा, झाड़-फूंक आदि) की बजाय सीधे डॉक्टर के पास पहुंचना जीवनरक्षक साबित हो सकता है.