भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक बहस के बीच अमेरिका में भी वोटर लिस्ट की जांच और उसे दुरुस्त करने की प्रक्रिया चर्चा में है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन राज्यों से मतदाता सूचियों का विस्तृत डेटा मांग रहा है और गैर-नागरिकों की संभावित पंजीकरण प्रविष्टियों की पहचान के लिए संघीय डेटाबेस के इस्तेमाल पर जोर दे रहा है। हालांकि अमेरिकी व्यवस्था भारत के SIR से अलग है, लेकिन दोनों अभियानों में मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने पर जोर दिखाई देता है।
वोटर लिस्ट की जांच पर ट्रंप प्रशासन का जोर
ट्रंप प्रशासन ने राज्यों से मतदाता पंजीकरण रिकॉर्ड उपलब्ध कराने और संघीय कानूनों के तहत उनकी सटीकता सुनिश्चित करने की मांग तेज की है। अमेरिकी न्याय विभाग का कहना है कि मतदाता सूचियों की नियमित समीक्षा जरूरी है, ताकि ऐसे लोगों के नाम रिकॉर्ड में न रहें जो मतदान के लिए पात्र नहीं हैं। प्रशासन विशेष रूप से गैर-अमेरिकी नागरिकों के संभावित पंजीकरण की पहचान पर जोर दे रहा है।
भारत के SIR से क्यों हो रही तुलना
भारत में SIR के दौरान मतदाताओं के नाम, पते और पात्रता का सत्यापन किया जाता है तथा मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। अमेरिका में चल रही कवायद का उद्देश्य भी मतदाता सूचियों को अधिक सटीक बनाना है, लेकिन वहां चुनाव प्रशासन मुख्य रूप से राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसलिए अमेरिका की मौजूदा प्रक्रिया को भारत के SIR की हूबहू नकल कहना सही नहीं होगा।
डेटा को लेकर राज्यों और केंद्र में टकराव
ट्रंप प्रशासन की मांगों को लेकर कई राज्यों में विवाद भी सामने आया है। न्याय विभाग ने बड़ी संख्या में राज्यों से विस्तृत मतदाता रिकॉर्ड मांगे हैं, जबकि कई राज्य संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी साझा करने को लेकर आपत्ति जता चुके हैं। इस मुद्दे पर अदालतों में भी कानूनी लड़ाई चल रही है और कुछ मामलों में संघीय सरकार की मांगों को चुनौती दी गई है।
मिडटर्म चुनाव से पहले बढ़ी हलचल
अमेरिका में 2026 के मिडटर्म चुनावों से पहले मतदाता पात्रता और वोटर लिस्ट की शुद्धता राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। प्रशासन का तर्क है कि चुनावी प्रक्रिया में केवल पात्र नागरिकों का नाम होना चाहिए, जबकि आलोचकों को आशंका है कि बड़े पैमाने पर डेटा मिलान और नाम हटाने की प्रक्रिया में वैध मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं। संघीय डेटाबेस के इस्तेमाल को लेकर अदालतों में भी गंभीर सवाल उठे हैं।
ट्रंप ने भारत की चुनाव व्यवस्था का भी किया उल्लेख
इसी बीच ट्रंप ने भारत की चुनाव व्यवस्था और मतदाता पहचान प्रणाली का हवाला देते हुए अमेरिका में कड़े चुनावी नियमों की पैरवी की है। उन्होंने प्रस्तावित SAVE America Act के समर्थन में भारत का उदाहरण दिया और मतदाता पहचान तथा नागरिकता सत्यापन को मजबूत करने की जरूरत बताई। ऐसे में अमेरिका में वोटर लिस्ट की मौजूदा कवायद को भारत के SIR से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि दोनों देशों की संवैधानिक और चुनावी व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण अंतर हैं।