Jagannath Rath Yatra 2025: श्रद्धा, भक्ति और परंपरा के सबसे भव्य त्योहारों में से एक, भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा आज अपने विशेष पड़ाव पर पहुंच रही है। आज के दिन भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा, रथ यात्रा के दूसरे चरण में ‘गुंडिचा मंदिर’ (जिसे भक्त प्रेम से 'मौसी का घर' कहते हैं) पहुंचेंगे। इस अवसर को लेकर पूरे शहर में उत्सव का माहौल है और भक्तों में अपार उल्लास देखने को मिल रहा है।
3 किमी दूर है स्थित
गुंडिचा मंदिर, जो मुख्य श्रीमंदिर से करीब 3 किलोमीटर दूर स्थित है, भगवान जगन्नाथ का ननिहाल माना जाता है। हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से शुरू होने वाली रथ यात्रा में भगवान अपने रथ पर सवार होकर इस मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं। वहां वे नौ दिनों तक विश्राम करते हैं और भक्तों को दर्शन देते हैं। इस विशेष पड़ाव को भगवान का स्नेह से भरपूर पारिवारिक मिलन माना जाता है।
अन्य रथयात्रा निकाली जाएंगी
रथ यात्रा के दौरान तीन विशाल रथ – नंदीघोष (भगवान जगन्नाथ का रथ), तालध्वज (बलभद्र) और दर्पदलना (सुभद्रा) – भव्य रूप से सजाए जाते हैं और लाखों श्रद्धालु इन्हें खींचने के लिए एकत्रित होते हैं। आज का दिन विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है क्योंकि भगवान का मौसी के घर आगमन भक्तों के लिए सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
प्रशासन के विशेष इंतजाम
इस वर्ष प्रशासन द्वारा विशेष इंतज़ाम किए गए हैं ताकि रथ यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। साथ ही, लाइव स्ट्रीमिंग और डिजिटल माध्यमों से देश-विदेश में बसे श्रद्धालु भी इस पावन अवसर के साक्षी बन रहे हैं। आज का दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से भी अत्यंत खास है। यह पर्व हमें आस्था, अपनापन और परंपरा की शक्ति का स्मरण कराता है। भक्त भावविभोर होकर भगवान के स्वागत में संलिप्त हैं — मौसी के घर आज साक्षात भगवान पधार रहे हैं।