Naxalite network has increased: बस्तर के जंगलों से सामने आ रहे हालिया घटनाक्रम नक्सल आंदोलन के लिए निर्णायक मोड़ का संकेत दे रहे हैं। सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और रणनीतिक दबाव के चलते संगठन का शीर्ष नेतृत्व कमजोर पड़ता दिख रहा है, जिससे पूरे नेटवर्क में अस्थिरता बढ़ गई है।
शीर्ष नेताओं की तलाश
सूत्रों के अनुसार, नक्सल आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक मुप्पला लक्ष्मण राव के नेपाल भागने की खबर है, जबकि उसका करीबी सहयोगी मिशिर Jharkhand में छिपा बताया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां इन तक पहुंच बनाने के लिए लगातार अभियान चला रही हैं, जिसे संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
सरेंडर और एनकाउंटर से कमजोर होता ढांचा
इसी बीच प्रभावशाली नक्सली कमांडर पापा राव के अपने साथियों के साथ आत्मसमर्पण की खबर सामने आई है। पिछले कुछ समय में कई बड़े नक्सली नेता मुठभेड़ों में मारे गए हैं और बड़ी संख्या में कैडर ने सरेंडर किया है। इससे संगठन का मनोबल तेजी से गिरा है।
रणनीति में बदलाव का दिखा असर
सुरक्षा बलों ने अब केवल मुठभेड़ों के बजाय खुफिया तंत्र को मजबूत किया है और स्थानीय लोगों के साथ विश्वास बढ़ाने पर जोर दिया है। Dantewada, Sukma और Bijapur जैसे क्षेत्रों में विकास कार्यों के चलते युवाओं का रुझान मुख्यधारा की ओर बढ़ा है।
अंतिम चरण की ओर बढ़ता नक्सलवाद
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार कार्रवाई और पुनर्वास नीतियों के कारण नक्सलवाद अपने सबसे कमजोर दौर में है। हालांकि कुछ दूरदराज इलाकों में अभी भी इसकी मौजूदगी बनी हुई है, लेकिन जिस तरह से नेतृत्व बिखर रहा है, उससे संकेत मिलते हैं कि यह समस्या धीरे-धीरे अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है।