नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में पुस्तक Seeking The Infinite का लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ मौजूद रहे। पुस्तक के लेखक याकूब मैथ्यू हैं। कार्यक्रम में साहित्य, नीति और समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने भाग लिया।
जीवन को देखने और जीने का अंतर
अपने संबोधन में धनखड़ ने कहा कि कुछ लोग जीवन केवल जीते हैं, कुछ उसे दूर से देखते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो जीवन को नए अर्थ देने का प्रयास करते हैं। उनके अनुसार यह पुस्तक केवल घटनाओं का विवरण नहीं, बल्कि आत्मजागरण की यात्रा को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि यह रचना पाठकों को भीतर झांकने और अपने अनुभवों को नए दृष्टिकोण से समझने के लिए प्रेरित करती है।
आध्यात्मिक यात्रा, 17 मित्रों का संकल्प
धनखड़ ने बताया कि लेखक ने पारंपरिक उत्सव के बजाय अपने जन्मदिन पर 17 मित्रों के साथ आध्यात्मिक यात्रा का निर्णय लिया। विभिन्न देशों और संस्कृतियों से आए इन लोगों ने कुंभ के अनुभव को महसूस किया। पुस्तक में इस यात्रा को जागृति और आत्मअन्वेषण के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो सीमाओं से परे एकता का संदेश देती है।
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एकता का संदेश
कार्यक्रम में 2025 के महाकुंभ का उल्लेख भी हुआ, जिसे मानवता को जोड़ने वाला आयोजन बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि यह पुस्तक उन लोगों के लिए भी खास है जो वहां नहीं पहुंच सके। इसमें तस्वीरों और अनुभवों के माध्यम से आध्यात्मिक माहौल को जीवंत किया गया है।
अनंत एक यात्रा है
लेखक याकूब मैथ्यू ने कहा कि अनंत कोई निश्चित मंजिल नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली यात्रा है। उन्होंने भारतीय संस्कृति को देश की बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि आत्मचिंतन और आधुनिक जीवन के बीच संतुलन जरूरी है। कार्यक्रम का समापन इसी संदेश के साथ हुआ कि खोज और अनुभूति की यह यात्रा हर व्यक्ति के भीतर जारी रहनी चाहिए।