Seema Asian Games Bronze Medal : हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले की रहने वाली 25 वर्षीय धाविका सीमा ने एशियन गेम्स में महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। सीमा इस स्पर्धा में पदक जीतने वाली भारत की तीसरी महिला एथलीट बन गई हैं। नागोया में हुए इस मुकाबले में उन्होंने 32 मिनट 50.05 सेकेंड का समय निकालकर देश का नाम रोशन किया।
मां को नहीं दी जापान जाने की खबर
सीमा की सफलता के पीछे एक भावुक कहानी भी छिपी है। उन्होंने एशियन गेम्स में हिस्सा लेने के लिए जापान जाने की बात अपनी 78 वर्षीय मां को नहीं बताई थी। सीमा का कहना है कि उनकी मां उनकी हर यात्रा को लेकर चिंता करती हैं और उन्हें उच्च रक्तचाप की समस्या भी है। इसलिए उन्होंने मां को यही बताया कि वह बेंगलुरु के प्रशिक्षण शिविर में हैं।
पिता का साया जल्दी उठ गया
सीमा का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। जब वह सिर्फ 12 साल की थीं, तब उनके पिता का निधन हो गया था। आर्थिक चुनौतियों के बीच उन्होंने बचपन में नंगे पैर दौड़ लगाई और मवेशी भी चराए। गांव में कई लोगों ने उनके खेल करियर पर सवाल उठाए, लेकिन उनकी मां हमेशा उनके साथ खड़ी रहीं।
कड़ी मेहनत ने दिलाया बड़ा मुकाम
कठिन परिस्थितियों के बावजूद सीमा ने हार नहीं मानी। लगातार मेहनत और प्रशिक्षण के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। पिछले साल विश्व विश्वविद्यालय खेलों में रजत पदक जीतने वाली सीमा अब एशियन गेम्स के मंच पर भी चमक बिखेर चुकी हैं। उन्होंने अपनी तैयारी का श्रेय अपने कोच और प्रशिक्षण टीम को भी दिया।
सोने का सपना था, कांस्य मिला
सीमा ने बताया कि वह इस दौड़ में स्वर्ण पदक जीतने के इरादे से उतरी थीं। उनके मुताबिक पूरी दौड़ काफी रणनीतिक रही और सभी खिलाड़ी पदक के लिए संघर्ष कर रहे थे। हालांकि वह स्वर्ण नहीं जीत सकीं, लेकिन कांस्य पदक हासिल कर उन्होंने अपने पहले एशियन गेम्स को यादगार बना दिया।
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अब 5000 मीटर पर नजर
कांस्य पदक जीतने के बाद सीमा का सफर अभी खत्म नहीं हुआ है। वह 28 सितंबर को महिलाओं की 5000 मीटर दौड़ में भी हिस्सा लेंगी। सीमा का कहना है कि अब उनका लक्ष्य और बेहतर प्रदर्शन करना है। एक छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने वाली सीमा की कहानी आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।