पाकिस्तानी महिला सीमा हैदर और सचिन मीणा को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। पहले “लप्पू सा सचिन” बयान से चर्चा में आईं मिथिलेश भाटी ने इस बार सीमा के बच्चों को लेकर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि इतनी जल्दी-जल्दी बच्चों का जन्म समझ से बाहर है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है।
सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया
मिथिलेश के बयान के बाद इंटरनेट पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने कहा कि किसी महिला के निजी जीवन पर इस तरह की टिप्पणी करना ठीक नहीं है। वहीं कुछ यूजर्स ने मामले को बेवजह तूल देने से बचने की अपील की। कई लोगों का मानना है कि निजी फैसलों को लेकर सार्वजनिक मंच पर टिप्पणी से विवाद ही बढ़ता है।
सीमा-सचिन की ओर से चुप्पी
इस पूरे मामले पर सीमा हैदर और सचिन मीणा की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। उनके करीबी लोगों का कहना है कि दोनों बार-बार हो रही बयानबाज़ी से परेशान जरूर हैं, लेकिन अब इन बातों पर ध्यान नहीं देना चाहते। उनका कहना है कि वे अपने परिवार और बच्चों पर ध्यान देना चाहते हैं और निजी जिंदगी को शांतिपूर्वक जीना चाहते हैं।
कैसे चर्चा में आई थीं मिथिलेश
सीमा हैदर जब 2023 में नेपाल के रास्ते भारत आईं और ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा में रहने लगीं, तब मिथिलेश भाटी ने मीडिया के सामने बयान दिया था, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। उसी बयान के बाद वे अचानक सुर्खियों में आ गईं। बताया जाता है कि वे स्थानीय स्तर पर सामाजिक कामों से भी जुड़ी रही हैं, लेकिन सीमा मामले में दिए गए बयानों के कारण ज्यादा चर्चा में रहती हैं।
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सीमा-सचिन की कहानी
सीमा और सचिन की मुलाकात ऑनलाइन गेम खेलने के दौरान हुई थी। बाद में दोनों नेपाल में मिले और शादी का दावा किया। मई 2023 में सीमा अपने बच्चों के साथ भारत आ गईं। अवैध तरीके से देश में प्रवेश के मामले में दोनों पर केस दर्ज हुआ और फिलहाल वे जमानत पर बाहर हैं। सीमा के पहले पति गुलाम हैदर ने भी बच्चों की वापसी को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू की है। मामला अभी अदालत में लंबित है।
आगे क्या होगा?
सीमा ने भारत में रहने की इच्छा जताई है और पाकिस्तान लौटने से इनकार किया है। उन्होंने पहले अपने साथ प्रताड़ना के आरोप भी लगाए थे। अब मिथिलेश के ताजा बयान से मामला फिर सुर्खियों में है। हालांकि कानूनी प्रक्रिया जारी है और अंतिम फैसला अदालत को ही करना है। फिलहाल यह मुद्दा सामाजिक और कानूनी बहस का विषय बना हुआ है।