Sensex Fall IRDAI Rules : भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1200 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बाजार के लगभग सभी प्रमुख शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। खासकर बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा क्षेत्र के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला।
IRDAI के प्रस्ताव पर क्यों मची हलचल?
बाजार में गिरावट की प्रमुख वजह बीमा नियामक IRDAI का प्रस्तावित ड्राफ्ट माना जा रहा है। "रीकैलिब्रेटिंग इकोनॉमिक्स ऑफ इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन" नाम के इस प्रस्ताव का उद्देश्य बीमा वितरण प्रणाली में बदलाव करना है। इसमें अनिवार्य थर्ड-पार्टी मोटर बीमा और अन्य लोकप्रिय बीमा उत्पादों पर मिलने वाले कमीशन को कम करने का सुझाव दिया गया है। इससे बैंकों, बीमा एजेंसियों और वितरण कंपनियों की आय प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
बीमा और फिनटेक शेयरों में सबसे ज्यादा असर
प्रस्ताव सामने आने के बाद बीमा और फिनटेक कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। पीबी फिनटेक जैसे शेयरों में भारी बिकवाली हुई। निवेशकों को चिंता है कि यदि कमीशन संरचना में बदलाव लागू होता है तो इन कंपनियों के राजस्व और मुनाफे पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से इस क्षेत्र के शेयरों में दबाव बढ़ गया।
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वैश्विक कारण भी बने बड़ी वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि गिरावट सिर्फ घरेलू कारणों से नहीं आई। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। ऊंची यील्ड के कारण वैश्विक निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे उभरते बाजारों से पूंजी निकलने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रखने की संभावना भी बाजार पर दबाव बना रही है।
कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव का असर
ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने से भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए चिंता बढ़ गई है। इससे महंगाई, आयात बिल और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है। वहीं अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भी वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता पैदा की है, जिसका असर भारतीय बाजार पर दिखाई दिया।
निवेशकों को किन बातों पर रखनी होगी नजर?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दिनों में निवेशकों को कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर नजर रखनी होगी। फिलहाल बाजार पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह के दबाव बने हुए हैं, जिसके चलते उतार-चढ़ाव का दौर जारी रह सकता है।