अमेरिका की ओर से भारत समेत 17 देशों पर 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने के बाद शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार दबाव में रहा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 900 अंक तक टूट गया, हालांकि आखिर में कुछ रिकवरी आई। इसके बावजूद बाजार लगातार पांचवें कारोबारी दिन गिरावट के साथ बंद हुआ।
सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद
बीएसई सेंसेक्स 331.62 अंक यानी 0.43 फीसदी गिरकर 76,059.77 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 102.15 अंक यानी 0.43 फीसदी की गिरावट के साथ 23,767.45 अंक पर आ गया। पूरे सप्ताह शेयर बाजार दबाव में रहा और लगातार पांचवें दिन गिरावट दर्ज की गई।
इटरनल और बजाज फाइनेंस सबसे ज्यादा फिसले
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 19 गिरावट के साथ बंद हुए। सबसे ज्यादा नुकसान इटरनल को हुआ, जिसका शेयर 2.15 फीसदी टूटा। बजाज फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारती एयरटेल, इंफोसिस, एशियन पेंट्स, टाटा स्टील और सन फार्मा में भी उल्लेखनीय गिरावट रही। दूसरी ओर एचसीएल टेक, आईटीसी, एक्सिस बैंक, ट्रेंट, मारुति, रिलायंस, टीसीएस और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए।
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ऑटो सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी ऑटो में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह दिन का सबसे कमजोर सेक्टर रहा। निफ्टी रियल्टी और फार्मा इंडेक्स भी दबाव में रहे। हालांकि आईटी और मीडिया सेक्टर में हल्की मजबूती देखने को मिली। वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी मामूली गिरावट के साथ बंद हुए।
अमेरिकी टैरिफ बना बाजार की कमजोरी की बड़ी वजह
बाजार पर सबसे बड़ा असर अमेरिका के नए टैरिफ फैसले का रहा। अमेरिका ने भारत सहित 17 देशों से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर 10 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की है। यह फैसला अमेरिकी ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत की गई जांच के बाद लिया गया है। शुरुआत में 12.5 फीसदी टैरिफ की संभावना थी, लेकिन भारत को 10 फीसदी श्रेणी में रखा गया है। इसके बावजूद निवेशकों में निर्यात और वैश्विक कारोबार को लेकर चिंता बनी रही।
निवेशकों की नजर अब अगले संकेतों पर
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक व्यापार नीति, अमेरिकी टैरिफ और कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करेंगे। फिलहाल निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता और वैश्विक आर्थिक संकेतों का घरेलू बाजार पर आगे क्या असर पड़ता है।