हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने शानदार प्रदर्शन किया। निवेशकों की जोरदार खरीदारी के चलते सेंसेक्स करीब 1700 अंक चढ़कर 75,528 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी भी 464 अंक की बड़ी बढ़त के साथ 23,626 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में लगभग सभी सेक्टरों में तेजी देखने को मिली। इस उछाल से निवेशकों के चेहरे खिल गए और बाजार में फिर से सकारात्मक माहौल बन गया।
सुबह से ही दिखा खरीदारी का जोश
कारोबार की शुरुआत से ही बाजार में तेजी का माहौल था। सेंसेक्स करीब 950 अंक बढ़कर 74,788 पर खुला, जबकि निफ्टी 260 अंक चढ़कर 23,428 पर पहुंच गया। निवेशकों को उम्मीद है कि मिडिल ईस्ट में तनाव कम हो सकता है, जिसका असर दुनिया भर के बाजारों पर दिख रहा है। इसी उम्मीद ने भारतीय बाजार में भी खरीदारी को बढ़ावा दिया। पूरे दिन बाजार में तेजी बनी रही और अंत में मजबूत बढ़त के साथ कारोबार खत्म हुआ।
बैंकिंग और बड़े शेयरों ने संभाली कमान
आज की तेजी में बैंकिंग और बड़े शेयरों की अहम भूमिका रही। बजाज फाइनेंस, एलएंडटी, इंडिगो, टाइटन और एचडीएफसी बैंक जैसे शेयरों में शानदार बढ़त देखने को मिली। वहीं एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एसबीआई जैसे बैंकिंग शेयरों ने बाजार को मजबूती दी। हालांकि टेक महिंद्रा और पावर ग्रिड जैसे कुछ शेयरों में गिरावट भी देखने को मिली, लेकिन इसका कुल बाजार पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।
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अमेरिका के बयान से बढ़ा भरोसा
बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका की ओर से आया वह संकेत माना जा रहा है, जिसमें ईरान के साथ तनाव कम होने की उम्मीद जताई गई। इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। इसका असर सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि अमेरिका और एशिया के बाजारों पर भी दिखाई दिया। अमेरिकी बाजारों में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई। डाउ जोन्स, एसएंडपी 500 और नैस्डैक सभी मजबूती के साथ बंद हुए। इसी सकारात्मक माहौल का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।
एशियाई बाजारों ने भी दिखाई ताकत
एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में भी तेजी देखने को मिली। जापान का निक्केई 225 तीन फीसदी से ज्यादा उछला। हांगकांग का हैंग सेंग और चीन का शंघाई कंपोजिट भी बढ़त के साथ बंद हुए। इससे साफ है कि निवेशकों का भरोसा सिर्फ भारत में नहीं बल्कि दुनिया भर के बाजारों में लौटा है। वैश्विक स्तर पर माहौल बेहतर होने का फायदा भारतीय बाजार को भी मिला।
कच्चा तेल सस्ता, लेकिन एक चिंता बाकी
भारत के लिए एक और अच्छी खबर यह रही कि कच्चे तेल की कीमतें फिर 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं। इससे महंगाई और आयात खर्च कम होने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। 11 जून को विदेशी निवेशकों ने करीब 1,987 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू निवेशकों ने 4,224 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इसके बावजूद घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी ने बाजार को शानदार बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई।