मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने शेयर बाजार पर सीधा असर डाला है। तेल और गैस ठिकानों पर हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमत अचानक बढ़ गई है। ब्रेंट क्रूड 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जिससे पूरी दुनिया के बाजारों में चिंता फैल गई। एक्सपर्ट मानते हैं कि तेल की कीमत बढ़ना हमेशा बाजार के लिए बड़ा खतरा बन जाता है।
खुलते ही बाजार में भारी गिरावट
भारतीय शेयर बाजार में कारोबार शुरू होते ही बड़ी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स करीब 1900 अंक तक गिर गया, जबकि निफ्टी भी 550 अंक से ज्यादा टूट गया। कुछ घंटों के बाद भी बाजार संभल नहीं पाया और भारी दबाव में कारोबार करता रहा। इससे निवेशकों में घबराहट का माहौल बन गया।
विदेशी बाजारों से मिले थे संकेत
भारतीय बाजार में गिरावट के संकेत पहले ही विदेशी बाजारों से मिल रहे थे। जापान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया के बाजार भी भारी गिरावट में थे। इसका मुख्य कारण तेल की बढ़ती कीमतें और युद्ध का खतरा था। एक्सपर्ट बताते हैं कि जब वैश्विक बाजार गिरते हैं, तो उसका असर भारत पर भी साफ दिखाई देता है।
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बैंकिंग और बड़े शेयर सबसे ज्यादा टूटे
इस गिरावट में सबसे ज्यादा नुकसान बैंकिंग और बड़े शेयरों को हुआ। एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, बजाज फाइनेंस और कोटक बैंक जैसे बड़े शेयर तेजी से नीचे आए। इसके अलावा ऑटो और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के शेयर भी दबाव में रहे। इससे साफ है कि बाजार में व्यापक स्तर पर बिकवाली देखने को मिली।
डर का पैमाना तेजी से बढ़ा
शेयर बाजार में डर को मापने वाला इंडेक्स भी तेजी से बढ़ गया है। इसमें करीब 15 प्रतिशत तक उछाल आया, जो आने वाले समय में बड़े उतार-चढ़ाव का संकेत देता है। एक्सपर्ट के अनुसार जब यह इंडेक्स बढ़ता है, तो बाजार में अनिश्चितता और जोखिम दोनों बढ़ जाते हैं।
आगे क्या हो सकता है बाजार का हाल
अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि मिडिल ईस्ट का तनाव कब तक जारी रहता है। अगर हालात नहीं सुधरे, तो बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है। एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि इस समय जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें और सोच-समझकर निवेश करें। फिलहाल बाजार पूरी तरह खबरों के असर में चल रहा है।