ये खिलाड़ी नहीं आग के गोले बन चुके हैं जो मैदान में उतरते ही शोला बन जाते हैं। विजय हजारे ट्रॉफी के एक दिन ने पूरे क्रिकेट जगत को हिलाकर रख दिया जब एक नहीं बल्कि सात शतक देखने को मिले। गेंदबाजों की लाइन और लेंथ पूरी तरह बिखर गई और कप्तान भी समझ नहीं पाए कि आखिर बचाव कहां करें। चौके छक्कों की बारिश ने फैंस को झूमने पर मजबूर कर दिया। कोई 19 तो कोई 20 से ज्यादा चौके छक्के लगाता दिखा और हर पारी चर्चा का विषय बन गई।
पांड्या और संजू का तूफान
इस दिन का सबसे बड़ा नाम बने हार्दिक पंड्या जिन्होंने राजकोट में बड़ौदा को संकट से बाहर निकाला। सातवें नंबर पर उतरकर उन्होंने दबाव में ऐसा खेल दिखाया जो यादगार बन गया। विदर्भ के खिलाफ एक ओवर में 34 रन और लगातार पांच छक्कों ने मैच का रुख बदल दिया। 92 गेंदों में 133 रन की पारी सिर्फ स्कोर नहीं बल्कि संदेश थी। दूसरी ओर केरल के लिए संजू सैमसन ने ओपनिंग करते हुए शुरुआत में ही साफ कर दिया कि आज रन बरसेंगे। 90 गेंदों में शतक और 312 के लक्ष्य का आसान पीछा इस बात का सबूत बना।
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तिलक और अक्षर का कहर
इस तूफानी दिन में सिर्फ पांड्या और संजू ही नहीं चमके। हैदराबाद के लिए तिलक वर्मा ने कप्तानी जिम्मेदारी निभाते हुए चंडीगढ़ के खिलाफ 109 रन ठोके। उनके बल्ले से निकली हर शॉट में आत्मविश्वास झलक रहा था। वहीं गुजरात के लिए अक्षर पटेल ने चोट से वापसी करते हुए आंध्रा के खिलाफ 130 रन की पारी खेली। चौके छक्कों की इस बरसात ने दिखा दिया कि फॉर्म में लौटे अक्षर कितने खतरनाक हो सकते हैं।
शतक की लगी कतार
दिन यहीं नहीं रुका क्योंकि शतकों की कतार लगी रही। कर्नाटक के लिए देवदत्त पडिक्कल ने त्रिपुरा के खिलाफ 108 रन बनाए। बंगाल के कप्तान अभिमन्यु ईश्वरन ने असम के खिलाफ 102 रन की पारी खेली। केरल के कप्तान रोहन कुन्नूमल ने 124 रन ठोककर संजू के साथ 212 रन की साझेदारी की। एक ही दिन में सात शतक और हर पारी अलग कहानी बन गई जिसने साबित कर दिया कि भारतीय घरेलू क्रिकेट में बल्लेबाजी की गहराई सिर्फ नाम नहीं हकीकत है।