भारत में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड यानी SGB को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। अब सेकेंड्री मार्केट से खरीदे गए बॉन्ड पर मैच्योरिटी के समय टैक्स देना होगा। पहले ऐसा नहीं था। अभी तक अगर कोई निवेशक सेकेंड्री मार्केट से SGB खरीदकर उसे परिपक्वता तक रखता था, तो उसे कैपिटल गेन टैक्स नहीं देना पड़ता था। लेकिन नए नियम के बाद यह छूट खत्म कर दी गई है।
1 अप्रैल से लागू होगा नया नियम
यह बदलाव नए बजट में किया गया है और 1 अप्रैल से लागू होगा। इसका मतलब साफ है कि अगर किसी ने एक्सचेंज से SGB खरीदा है और वह मैच्योरिटी तक उसे रखता है, तो उसे लाभ पर टैक्स चुकाना पड़ेगा। यह नियम खासतौर पर उन निवेशकों को प्रभावित करेगा, जो डिस्काउंट पर बॉन्ड खरीदकर टैक्स फ्री फायदा लेने की योजना बनाते थे।
किसे मिलेगा अब भी टैक्स फ्री लाभ?
कर विशेषज्ञ नितिन कौशिक के मुताबिक टैक्स छूट अब सिर्फ उन्हीं लोगों को मिलेगी, जिन्होंने SGB सीधे भारतीय रिजर्व बैंक के जरिए प्राथमिक निर्गम में खरीदा था और उसे पूरी अवधि तक अपने पास रखा। ऐसे निवेशकों को 2.5 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ मैच्योरिटी पर कैपिटल गेन टैक्स से राहत मिलेगी।
सेकेंड्री मार्केट वालों के लिए क्या नियम?
जो लोग स्टॉक एक्सचेंज से SGB खरीदते हैं, उन्हें भी 2.5 प्रतिशत सालाना ब्याज मिलेगा। लेकिन परिपक्वता पर जो लाभ होगा, उस पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होगा। अगर बॉन्ड किसी और को गिफ्ट कर दिया गया या एक्सचेंज के जरिए खरीदा गया, तो टैक्स छूट का फायदा खत्म हो जाएगा।
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उदाहरण से समझें पूरा मामला
मान लीजिए किसी निवेशक ने एक्सचेंज से 7,000 रुपये में एक SGB खरीदा और मैच्योरिटी पर उसकी कीमत 11,000 रुपये हो गई। ऐसे में 4,000 रुपये का लाभ टैक्स के दायरे में आएगा। 12.5 प्रतिशत की दर से करीब 500 रुपये टैक्स देना होगा। पहले यह पूरा फायदा निवेशक के पास रहता था।
निवेश रणनीति बदलनी पड़ेगी
इस बदलाव के बाद सेकेंड्री मार्केट से SGB खरीदकर टैक्स फ्री फायदा लेने की योजना अब कमजोर पड़ गई है। निवेशकों को अब यह तय करना होगा कि वे सीधे प्राथमिक निर्गम में निवेश करें या फिर टैक्स को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति बनाएं। सोने में निवेश अब पहले जैसा आसान गणित नहीं रहा।