Shadi Vivah Muhurat: हिंदू धर्म में विवाह केवल एक सामाजिक संबंध नहीं, बल्कि एक पवित्र संस्कार माना जाता है। इसलिए शादी का शुभ मुहूर्त चुनते समय पंचांग, ग्रहों की स्थिति और तिथियों का विशेष ध्यान रखा जाता है। ज्योतिषविदों के अनुसार वर्ष में कुछ तिथियाँ ऐसी मानी जाती हैं, जिन पर विवाह का आयोजन शुभ नहीं होता। इन दिनों में ग्रहों की चाल अनुकूल नहीं रहती और विवाह के बाद संबंधों या जीवन में अस्थिरता आने की आशंका बताई जाती है। आइए जानते हैं किन तिथियों को अशुभ माना गया है और क्यों इन दिनों में शुभ कार्य करने से परहेज़ किया जाता है।
अमावस्या तिथि को विवाह करना क्यों माना जाता है अशुभ
अमावस्या को चंद्रमा पूर्ण रूप से क्षीण होता है, जिसे मानसिक अस्थिरता और ऊर्जा में कमी का कारक माना गया है। विवाह जैसे पवित्र और दीर्घकालिक बंधन के लिए मानसिक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा आवश्यक होती है। इसलिए ज्योतिषविद अमावस्या के दिन विवाह से बचने की सलाह देते हैं। इस दिन किए गए मंगल कार्यों का फल कम और बाधाएँ अधिक मानी जाती हैं।
पितृपक्ष में शुभ कार्यों पर रोक का कारण
पितृपक्ष पूर्वजों का काल माना जाता है, जब लोग तर्पण और श्राद्ध के माध्यम से उन्हें स्मरण करते हैं। इस अवधि में उत्सव, हर्षोल्लास और मांगलिक कार्य करना उचित नहीं माना गया है। पितृपक्ष में ग्रहों की स्थिति भी स्थिर नहीं रहती, जिसके चलते विवाह जैसी शुभ क्रियाएँ स्थगित कर दी जाती हैं। ज्योतिष के अनुसार इस दौरान किए गए विवाह से दांपत्य जीवन में तनाव बढ़ सकता है।
होली से पहले पाए जाने वाले भद्रा काल का प्रभाव
कुछ तिथियों में ‘भद्रा’ नामक काल लगता है, जिसे अशुभ माना जाता है। भद्रा काल में शुरू किए गए कार्यों में बाधाएँ आने की आशंका मानी जाती है। ज्योतिषविदों का मत है कि इस समय विवाह करने से जीवन में अनावश्यक तनाव और संघर्ष बढ़ सकते हैं। इसलिए भद्रा समाप्त होने के बाद ही शुभ मुहूर्त का चयन किया जाता है।
एकादशी तिथि पर विवाह का निषेध क्यों
एकादशी का दिन उपवास, पूजा और व्रत के लिए पवित्र माना जाता है। इस तिथि को आध्यात्मिक साधना का दिन कहा गया है, जहाँ सांसारिक क्रियाओं और उत्सवों को प्राथमिकता नहीं दी जाती। विवाह जैसे सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रम इस दिन नहीं किए जाते, ताकि व्रत की पवित्रता बाधित न हो और कर्मों का संतुलन बना रहे।
शास्त्रसम्मत मुहूर्त का चयन
इन सभी तिथियों पर विवाह न करने का विचार केवल परंपरा नहीं, बल्कि ज्योतिषीय और ऊर्जात्मक कारणों से जुड़ा है। सही मुहूर्त चुनना न सिर्फ शादी के शुभ फल को बढ़ाता है, बल्कि दांपत्य जीवन में स्थिरता और सौहार्द भी सुनिश्चित करता है। यदि विवाह की योजना हो, तो इन तिथियों से बचकर शास्त्रसम्मत मुहूर्त का चयन करना ही उत्तम माना जाता है।