
टीम इंडिया की युवा ओपनर शेफाली वर्मा ने आखिरकार वो कर दिखाया, जिसका इंतजार फैंस से लेकर उनके पिता को भी था. साउथ अफ्रीका के खिलाफ ICC विमेंस वर्ल्ड कप फाइनल में शेफाली ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए शानदार 87 रनों की पारी खेली. ये पारी सिर्फ रन नहीं थी, बल्कि तीन साल की मेहनत, संघर्ष और भरोसे का नतीजा थी. सेमीफाइनल में नाकामी के बाद सबकी निगाहें उन पर थीं और शेफाली ने फाइनल में सबका दिल जीत लिया.
मुश्किल हालात, लेकिन शेफाली ने दिखाया दम
नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में फाइनल मुकाबला बारिश के कारण दो घंटे देरी से शुरू हुआ. टीम इंडिया ने टॉस गंवाया और पहले बल्लेबाजी करने उतरी. ऐसे हालात में खेलना आसान नहीं था, लेकिन शेफाली ने क्रीज पर आते ही हालात को आसान बना दिया. जहां बाकी बल्लेबाजों को रन बनाने में दिक्कत हो रही थी, वहीं शेफाली ने सिर्फ 49 गेंदों में अर्धशतक ठोक दिया. उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने साउथ अफ्रीकी गेंदबाजों को बैकफुट पर ला दिया.
तीन साल बाद टूटी ‘50 रन’ की बाधा
ये अर्धशतक शेफाली के लिए बेहद खास रहा. वनडे क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद पिछले तीन सालों से वो अर्धशतक नहीं बना पाई थीं. पिछली बार उन्होंने जुलाई 2022 में 50+ का स्कोर बनाया था. तब से शेफाली बार-बार 40 के पार पहुंचकर चूक जाती थीं लेकिन इस बार नहीं. उन्होंने इस बाधा को तोड़ते हुए 78 गेंदों में 87 रन बनाए, जिसमें 7 चौके और 2 छक्के शामिल थे. हालांकि वो शतक से चूक गईं, पर उनकी पारी ने भारत को मजबूत स्थिति में ला दिया.
सबसे युवा बनीं, पिता का सपना पूरा किया
इस धमाकेदार अर्धशतक के साथ शेफाली वर्ल्ड कप फाइनल में अर्धशतक जमाने वाली सबसे युवा बल्लेबाज बन गईं. बता दे सिर्फ 21 साल और 278 दिन की उम्र में शेफाली ने पचासा लगाया. इससे पहले ऐसा कमाल सिर्फ वीरेंद्र सहवाग (2003) और पूनम राउत (2017) ने किया था. मैच के बाद शेफाली ने कहा कि उन्होंने अपने पिता से वादा किया था कि फाइनल में बड़ी पारी खेलेंगी और उन्होंने वो वादा निभा दिया. भले ही शतक उनसे छूट गया, लेकिन उन्होंने अपने खेल से ये साबित कर दिया कि वो भारतीय क्रिकेट का भविष्य नहीं, वर्तमान हैं.