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Shahjahan Ki Mumtaj : इतिहास में प्रेम की मिसाल बन चुकी एक कहानी है मुग़ल सम्राट शाहजहाँ और उनकी पत्नी मुमताज़ महल की. मुमताज़ महल का असली नाम अर्ज़ुमंद बानो बेगम था। वे फ़ारसी मूल की एक सुंदर और गुणी महिला थीं। उनका जन्म 27 अप्रैल 1593 को हुआ था। मात्र 19 वर्ष की आयु में उनकी शादी 1612 में मुग़ल सम्राट शाहजहाँ (उस समय के राजकुमार ख़ुर्रम) से हुई। शादी के बाद उन्हें "मुमताज़ महल" की उपाधि दी गई, जिसका अर्थ है, "महल की चुनी हुई" या "महल की सबसे प्रिय".
मुमताज़ महल न केवल शाहजहाँ की पत्नी थीं, बल्कि उनकी सबसे प्रिय और विश्वासपात्र साथी भी थीं। इतिहासकारों के अनुसार, शाहजहाँ उनसे बेहद प्रेम करते थे और उन्होंने अपने जीवन के हर महत्वपूर्ण निर्णय में मुमताज़ से सलाह ली। मुमताज़ महल ने शाहजहाँ को कुल 14 संतानें दीं, जिनमें से कई बचपन में ही चल बसीं. मुमताज़ महल की मृत्यु 17 जून 1631 को हुई, जब वे अपने 14वें बच्चे को जन्म दे रही थीं। यह घटना बुरहानपुर (वर्तमान मध्य प्रदेश) में हुई, जहाँ शाहजहाँ दक्कन के युद्ध अभियान पर थे और मुमताज़ उनके साथ थीं। अत्यधिक रक्तस्राव और प्रसव की जटिलताओं के कारण उनकी हालत बिगड़ गई और उन्होंने वहीं अंतिम साँस ली। उनकी मृत्यु ने शाहजहाँ को गहरे दुख में डुबो दिया.
मुमताज़ महल की याद में ही शाहजहाँ ने आगरा में विश्व प्रसिद्ध स्मारक ताजमहल बनवाया, जो आज भी प्रेम का प्रतीक माना जाता है। यह भव्य मकबरा सफेद संगमरमर से बना है और इसे बनाने में लगभग 22 वर्ष लगे। मुमताज़ की अस्थायी समाधि पहले बुरहानपुर में बनाई गई थी, लेकिन बाद में उनके पार्थिव शरीर को आगरा लाकर ताजमहल में दफ़न किया गया. इस प्रकार मुमताज़ महल का जीवन और मृत्यु दोनों ही मुग़ल इतिहास के सबसे मार्मिक और प्रेमपूर्ण अध्यायों में से एक हैं, जिन्हें ताजमहल के रूप में हमेशा के लिए अमर कर दिया गया है.